छुट्टा भैंसा बना विवाद की जड़, मुकदमे की जगह 35 ग्रामीणों पर शांति भंग की कार्रवाई! भैंसे को मारकर गायब करने का आरोप, कार्रवाई के लिए दी गई शिकायत पर मुकदमा दर्ज न होने से उठे सवाल।

न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/परसामालिक

 

महराजगंज। थाना परसामालिक क्षेत्र के गंगवलिया टोला गंगापुर में जनहित में गांव में छोड़ा गया एक छुट्टा भैंसा अब विवाद की वजह बन गया है। मामले में जिगिना निवासी श्रीराम सिंह पुत्र रामअधारे ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि 12 अगस्त 2026 को गंगवलिया निवासी रुदल यादव समेत चार लोगों ने उक्त भैंसे को मारकर कहीं गायब कर दिया।

 

शिकायतकर्ता ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बजाय मामले को दो पक्षों के बीच का विवाद मानते हुए दोनों पक्षों के कुल 35 ग्रामीणों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई के लिए उपजिलाधिकारी न्यायालय को रिपोर्ट भेज दी।

 

मुकदमे की मांग के बीच 35 ग्रामीणों पर कार्रवाई

 

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार प्रथम पक्ष के 21 और द्वितीय पक्ष के 14, कुल 35 ग्रामीणों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126/135 के तहत कार्रवाई की गई। न्यायालय ने सभी को 30 सितंबर 2026 को 20-20 हजार रुपये के मुचलके पर तलब किया।

 

इस कार्रवाई के बाद गांव में नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि भैंसे को मारकर गायब करने की शिकायत पुलिस को दी गई थी तो आरोपों की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय दोनों पक्षों के 35 लोगों को ही शांति भंग के मामले में क्यों पाबंद किया गया?

 

पशु के साथ क्रूरता के आरोप पर कार्रवाई का सवाल

 

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में पशु के साथ मारपीट और उसे गायब करने का आरोप सही पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता से संबंधित कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

 

इस संबंध में जब थानाध्यक्ष परसामालिक विवेक सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा, “बिना कागज देखे कुछ कह नहीं सकता, अभी क्षेत्र में हूं।”

 

अब पूरे मामले में सवाल यह है कि भैंसे को लेकर शुरू हुए विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और 35 ग्रामीणों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई किन तथ्यों के आधार पर की गई? इसका जवाब पुलिस की जांच और न्यायालय की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।

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