घोटाले पर घोटाला कृतिमान बना रहा निचलौल विद्युत उपकेंद्र यूपीआई भुगतान के स्क्रीनशॉट से मचा हड़कंप!बिल घटाने के नाम पर हजारों का लेनदेन

न्यूज़ 18प्लस डेक्स हेड दिल्ली 

 

‘बड़े बाबू’ लाल बिहारी की उपयोगकर्ता पहचान से बिजली बिलों में कथित संशोधन का आरोप, मीटर रीडिंग और छेड़छाड़ के दावों ने भी खड़े किए गंभीर सवाल?

 

महराजगंज, 3 अक्टूबर। जिले के निचलौल विद्युत उपकेंद्र से बिजली बिलों में कथित अनियमितता और लेनदेन से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि उपकेंद्र में ‘बड़े बाबू’ के पद पर तैनात लाल बिहारी द्वारा अपनी उपयोगकर्ता पहचान के माध्यम से बिजली बिलों में अनुचित तरीके से कमी किए जाने का काम किया जा रहा है। मामले से जुड़े बताए जा रहे ऑनलाइन भुगतान के कई स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

 

सामने आए स्क्रीनशॉट में ‘लाल बिहारी’ नाम से जुड़े एक यूपीआई खाते पर अलग-अलग तारीखों में हजारों रुपये के कई लेनदेन दिखाई दे रहे हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि इन भुगतानों का संबंध बिजली बिलों में संशोधन कराने से है। हालांकि, इन लेनदेन का बिल संशोधन से सीधा संबंध है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

कई महीनों तक दिखाई दे रहे हैं लेनदेन

 

सामने आए स्क्रीनशॉट में दर्ज विवरण के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर निम्न रकम के लेनदेन दिखाई दे रहे हैं—

 

तारीख| रकम

28 अप्रैल 2025| ₹5,000

1 मई 2025| ₹2,500

14 मई 2025| ₹7,500

16 मई 2025| ₹5,000

26 मई 2025| ₹10,000

31 मई 2025| ₹1,415

8 जुलाई 2025| ₹3,000

3 सितंबर 2025| ₹6,000

10 सितंबर 2025| ₹3,000

18 सितंबर 2025| ₹7,000

19 सितंबर 2025| ₹5,000

10 अक्टूबर 2025| ₹2,000

16 अक्टूबर 2025| ₹5,000

17 अक्टूबर 2025| ₹3,000

29 अक्टूबर 2025| ₹500

13 नवंबर 2025| ₹9,000

27 नवंबर 2025| ₹10,000

2 दिसंबर 2025| ₹1,000

3 दिसंबर 2025| ₹4,000

18 दिसंबर 2025| ₹4,000

25 फरवरी| ₹10,000

27 फरवरी| ₹7,000

28 मार्च| ₹3,000

9 अप्रैल| ₹5,000

4 जून| ₹4,000

18 जून| ₹2,000

 

स्क्रीनशॉट में भुगतानकर्ता के सामने ‘लाल बिहारी’ नाम प्रदर्शित होने का दावा किया गया है। यूपीआई पहचान से जुड़े विवरण भी स्क्रीनशॉट में दिखाई देने की बात कही जा रही है। इन डिजिटल लेनदेन की वास्तविकता और भुगतान के उद्देश्य की पुष्टि संबंधित बैंकिंग अभिलेखों तथा विभागीय जांच से ही संभव होगी।

 

मीटर रीडिंग से लेकर बिल संशोधन तक उठे सवाल

 

मामले में आरोप केवल बिजली बिलों में कमी किए जाने तक सीमित नहीं हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि मीटर रीडिंग, मीटर से संबंधित कागजात और मीटर में कथित छेड़छाड़ के माध्यम से भी अनियमितता की जा सकती है। यदि ऐसा हुआ है तो इससे उपभोक्ताओं के बिजली बिलों के साथ-साथ विभागीय अभिलेखों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

 

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली बिलों में संशोधन की प्रक्रिया, संबंधित उपयोगकर्ता पहचान से किए गए बदलाव, मीटर रीडिंग और संशोधित बिलों का मिलान कराया जाना चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि किन उपभोक्ताओं के बिलों में कब और किस आधार पर संशोधन किया गया।

 

अधिशासी अभियंता और उपखंड अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल

 

पूरे प्रकरण में अधिशासी अभियंता, उपखंड अधिकारी और बड़े बाबू स्तर के कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी की प्रत्यक्ष संलिप्तता के संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

 

स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की जांच केवल सामने आए भुगतान स्क्रीनशॉट तक सीमित न रखकर बिजली विभाग के अभिलेखों, बिल संशोधन की उपयोगकर्ता पहचान, मीटर रीडिंग, मीटर से संबंधित कागजात और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

 

उच्चस्तरीय जांच की मांग

 

उपभोक्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में बिल संशोधन के बदले अवैध लेनदेन या विभागीय अभिलेखों में हेरफेर की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

लोगों का कहना है कि बिजली विभाग जैसी सार्वजनिक सेवा से जुड़ी व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होने से वास्तविकता सामने आएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

 

जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

 

फिलहाल सामने आए भुगतान स्क्रीनशॉट और लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे प्रकरण में विभागीय जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में यदि यूपीआई लेनदेन और बिजली बिल संशोधन के बीच कोई सीधा संबंध सामने आता है तो मामला और गंभीर हो सकता है।

 

अब सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर बिल संशोधन से जुड़े अभिलेखों और कथित ऑनलाइन लेनदेन की सच्चाई सामने लाएगा?

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