Bureau Report/ News 18 Plus /Nichlaul
मुख्यमंत्री जनता दर्शन में पहुंची शिकायत के बाद विकास कार्यों की जांच, आरसीसी सड़क, पोखरे की मिट्टी कटान और अन्य योजनाओं को लेकर उठाई गई थीं अनियमितताओं की शिकायतें।
महराजगंज। निचलौल विकास खंड की ग्राम पंचायत बैठवलिया में मनरेगा और विभिन्न विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई। मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में प्राप्त शिकायत के क्रम में हुई इस पड़ताल में शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए कई मुद्दों का सत्यापन किया गया। जांच रिपोर्ट में कुछ कार्य मौके पर मौजूद और निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने का उल्लेख है, जबकि पोखरे की मिट्टी कटान से प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में विकास कार्यों की गुणवत्ता, टिकाऊपन और सरकारी धन के सदुपयोग को लेकर उठे सवाल चर्चा में हैं।
ग्राम पंचायत बैठवलिया निवासी कन्हैया लाल जायसवाल पुत्र प्रभात लाल ने शिकायत में मनरेगा कार्यों में कथित धांधली, निर्माण के छह महीने के भीतर आरसीसी सड़क टूटने, जैविक खाद उत्पादन केंद्र के निर्माण में अनियमितता, मानकों के विपरीत हैंडपंप रीबोर और गांव में साफ-सफाई की बदहाल स्थिति के कारण बीमारी फैलने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद खंड विकास अधिकारी, निचलौल के स्तर से जांच कराई गई।
पोखरे की खुदाई पर खर्च 3.51 लाख, बरसात में मिट्टी कटान से प्रभावित कार्य
जांच विवरण के मुताबिक, ग्राम पंचायत बैठवलिया में वर्ष 2022-23 के दौरान मनरेगा के तहत छठ घाट स्थित पोखरे की खुदाई पर 3,51,421 रुपये खर्च किए गए थे। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्तमान में बरसात के कारण मिट्टी कट जाने से कार्य प्रभावित हुआ है। ऐसे में यह सवाल अहम है कि निर्माण और मिट्टी संरक्षण के लिए अपनाए गए उपाय कितने प्रभावी थे तथा भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
आरसीसी सड़क और अन्य कार्यों का अभिलेखों से सत्यापन
शिकायत में विनोद के घर से नंदलाल के घर तक तथा लालबहादुर के घर से गौसदन होते हुए प्राथमिक विद्यालय तक कराए गए कार्यों पर सवाल उठाए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन कार्यों का माप पुस्तिका (एमबी) के आधार पर सत्यापन किया गया और मौके पर कार्य मौजूद पाया गया। हालांकि, शिकायत में सड़क के छह महीने के भीतर टूटने का आरोप भी शामिल था। उपलब्ध जांच विवरण में सड़क की मजबूती और समय से पहले क्षतिग्रस्त होने के आरोप पर अलग से विस्तृत तकनीकी निष्कर्ष स्पष्ट नहीं है।
करीब 9.96 लाख की लागत से बना आरआरसी सेंटर
ग्राम पंचायत में निर्मित जैविक खाद उत्पादन केंद्र यानी आरआरसी सेंटर की लागत 9,96,421 रुपये बताई गई है। जांच रिपोर्ट में इसे निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। लेकिन विकास कार्यों की वास्तविक उपयोगिता का आकलन केवल निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए; केंद्र का नियमित संचालन और उससे ग्रामीणों को मिलने वाला लाभ भी महत्वपूर्ण है।
चार हैंडपंपों के रीबोर कार्य सही मिलने का दावा
जांच विवरण के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में कराए गए दो-दो हैंडपंपों के रीबोर कार्यों का मौके पर सत्यापन किया गया। रिपोर्ट में सभी कार्य सही और हैंडपंप चालू स्थिति में पाए जाने का उल्लेख है। वहीं, ग्राम सभा में साफ-सफाई का कार्य रोस्टर के अनुसार कराए जाने की बात भी जांच में दर्ज की गई है।
शिकायतों की जांच के बाद भी गुणवत्ता पर निगरानी जरूरी
बैठवलिया का मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाली धनराशि के अनुरूप ग्रामीणों को टिकाऊ और उपयोगी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। जांच रिपोर्ट में कई कार्य सही पाए जाने का उल्लेख जरूर है, लेकिन पोखरे की मिट्टी कटान और आरसीसी सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों पर पारदर्शी एवं तकनीकी आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध जांच विवरण में सभी आरोपों की पुष्टि नहीं होती। इसलिए किसी वित्तीय अनियमितता को सिद्ध मानना उचित नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, उपयोगिता और रखरखाव पर निरंतर निगरानी रखे, ताकि सरकारी धन का वास्तविक लाभ ग्राम पंचायत के लोगों तक पहुंच सके।