*स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद भालोटिया की पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि, त्याग और संघर्ष को किया नमन!*

Bureau Report/ News 18 Plus/ Siswa Kothibar 

 

सिसवा बाजार में याद किए गए राष्ट्रभक्त स्वतंत्रता सेनानी, उत्कर्ष भालोटिया ने दादाजी की गौरवगाथा जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प।

 

सिसवा बाजार (महराजगंज)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय रामप्रसाद भालोटिया की पुण्यतिथि पर सिसवा बाजार में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर उनके त्याग, संघर्ष और राष्ट्रसेवा को भावपूर्ण ढंग से याद किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सिल्वर फिनिक्स में हुआ, जहां उपस्थित गणमान्य लोगों ने स्वतंत्रता सेनानी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर देश की आजादी में उनके योगदान को नमन किया।

 

25 फरवरी 1891 को सिसवा बाजार में जन्मे रामप्रसाद भालोटिया ने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए उन्होंने कारावास, आर्थिक दंड और अमानवीय यातनाएं सहीं, लेकिन राष्ट्रसेवा और स्वाभिमान के मार्ग से पीछे नहीं हटे। उनका जीवन त्याग, साहस और देशभक्ति की प्रेरणादायी मिसाल रहा।

 

ऐतिहासिक एवं पारिवारिक विवरणों के अनुसार, महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनके संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे राष्ट्रभक्तों का योगदान देश की ऐतिहासिक विरासत है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

 

इस अवसर पर उत्कर्ष भालोटिया ने भावुक शब्दों में कहा कि अपने दादाजी की गौरवगाथा जन-जन तक पहुंचाना और उनके अधूरे सपनों को पूरा करना ही उनके जीवन का संकल्प है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के आदर्शों, संघर्षों और राष्ट्रप्रेम को समाज के बीच प्रसारित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुंवर अखिलेश सिंह (नौतनवा), समाजवादी पार्टी के सुशील कुमार टिबड़ेवाल, सिसवा नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ), जिला व्यापार मंडल अध्यक्ष सुरेश रूंगटा, दमन दीप सेठी तथा दुर्गा बजाज बड़हरा महंथ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने रामप्रसाद भालोटिया के योगदान को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

सिल्वर फिनिक्स में आयोजित यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम स्वतंत्रता सेनानी के त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को स्मरण करने के साथ-साथ उनके आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के संकल्प का भी प्रतीक बना।

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