*प्रोजेक्ट पहचान के तहत 1.5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग, 805 में मिली विकासात्मक बीमारियां!*

Bureau Report News 18 Plus Maharajganj 

 

जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित मिले 202 बच्चे, 121 में बहरापन और 86 बच्चों में पाई गई डीडीएच की समस्या; उपचार और निगरानी के लिए पोर्टल-ऐप का ट्रायल शुरू।

 

 

महराजगंज, 03 नवंबर। जिले में बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को प्रभावित करने वाली बीमारियों की समय से पहचान और समुचित उपचार सुनिश्चित करने के लिए संचालित प्रोजेक्ट पहचान के तहत मंगलवार को समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बच्चों की स्क्रीनिंग, विकासात्मक बाधाओं की पहचान, उपचार की व्यवस्था तथा प्रोजेक्ट पहचान पोर्टल एवं ऐप के संचालन की तैयारियों की समीक्षा की गई।

 

मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि स्क्रीनिंग का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए और चिह्नित बच्चों को बिना देरी आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षकों एवं प्रभारी अधीक्षकों को स्क्रीनिंग कार्य की नियमित समीक्षा करने तथा प्रभावित बच्चों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रोजेक्ट पहचान के लिए विकसित पोर्टल एवं ऐप का मंगलवार से परीक्षण शुरू कर दिया गया है। इसके माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की त्वरित एवं सटीक जानकारी दर्ज करने, प्रभावी निगरानी करने और उपचार की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी। सभी चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देशित किया गया कि आशा, एएनएम सहित स्क्रीनिंग कार्य में लगे स्वास्थ्यकर्मियों को पोर्टल के संचालन की जानकारी दें और परीक्षण के दौरान सामने आने वाली तकनीकी समस्याओं से अवगत कराएं।

 

मुख्य विकास अधिकारी ने चिकित्सकों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, आशा एवं एएनएम से पोर्टल का उपयोग कर अपना सुझाव और प्रतिक्रिया देने की अपील की, ताकि कमियों को दूर कर इसे अधिक सरल एवं प्रभावी बनाया जा सके।

 

जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि पोर्टल एवं ऐप पर चार स्तरों ग्राम पंचायत, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा जिला अस्पताल पर आंकड़े दर्ज करने की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक स्तर अपने अधीनस्थ स्तर के कार्यों की निगरानी भी कर सकेगा।

 

बैठक में आरबीएसके प्रभारी ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम, आशा, एएनएम तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर अब तक करीब 1.5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें 805 बच्चे विभिन्न प्रकार की विकासात्मक बाधाओं एवं बीमारियों से प्रभावित पाए गए हैं।

 

स्क्रीनिंग में सर्वाधिक 202 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित मिले हैं। इसके अलावा 121 बच्चों में जन्मजात बहरापन, 86 में डीडीएच तथा 76 बच्चों में कटे होंठ एवं तालू की समस्या पाई गई है। वहीं डाउन सिंड्रोम, भाषा विकास में देरी, माइक्रोसेफली सहित अन्य विकासात्मक समस्याओं से प्रभावित बच्चे भी चिह्नित किए गए हैं।

 

मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी प्रभावित बच्चों की अलग-अलग प्रोफाइल तैयार की जाए। इसमें बीमारी की स्थिति, आवश्यक उपचार तथा इलाज किस स्वास्थ्य केंद्र या उच्च चिकित्सा संस्थान में कराया जाना है, इसका स्पष्ट विवरण दर्ज किया जाए, ताकि प्रत्येक बच्चे को उसकी जरूरत के अनुसार समय से उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

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