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कथित राव चखना संचालकों का बढ़ता दबदबा, एक दिव्यांग व्यक्ति ने लगाए प्रताड़ना और अवैध वसूली के गंभीर आरोप; आबकारी विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल।
महराजगंज। निचलौल क्षेत्र में कथित अवैध गतिविधियों और वसूली को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मॉडल शॉप से निर्धारित दूरी के नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो दूसरी तरफ कथित राव चखना संचालकों के बढ़ते प्रभाव की चर्चा भी तेज हो गई है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर कारोबार संचालित किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभागों की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे गंभीर मामला एक दिव्यांग व्यक्ति से जुड़ा सामने आया है। आरोप है कि उसे लगातार परेशान किया जा रहा है और कथित तौर पर दुकानों व कारोबार को संचालित करने के एवज में रकम देने का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि उससे यह तक कहा जा रहा है कि यदि निर्धारित रकम नहीं दी गई तो दुकान बंद कर देनी होगी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह न केवल कानून व्यवस्था बल्कि छोटे कारोबारियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
क्षेत्र में चर्चा है कि मॉडल शॉप से निर्धारित 200 मीटर की दूरी के नियम को लेकर भी समान रूप से कार्रवाई नहीं हो रही है। सवाल यह है कि जिन स्थानों पर नियमों का उल्लंघन होने की शिकायतें हैं, वहां जिम्मेदार विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ रही? क्या नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं या फिर प्रभावशाली लोगों के लिए अलग व्यवस्था चल रही है? इन बिंदुओं पर आबकारी विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मनीष सिंह के जाने के बाद मिली थी राहत, फिर क्यों उठने लगी वसूली की चर्चा?
स्थानीय व्यापारियों के बीच यह भी चर्चा है कि मनीष सिंह के जाने के बाद दुकानदारों, होटल संचालकों और सिनेमा हॉल से जुड़े कारोबारियों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन अब एक बार फिर कथित वसूली और दबाव बनाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों का दावा है कि वसूली का नेटवर्क किन-किन स्थानों तक फैला है, इसकी जानकारी सामने आ सकती है। मनीष सिंह की ओर से कथित तौर पर वसूली के स्थानों और तौर-तरीकों की जानकारी दिए जाने की बात भी चर्चा में है। इन दावों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष को बेवजह आरोपों का सामना न करना पड़े।
आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय होगी या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?
इस पूरे प्रकरण में आबकारी विभाग के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यदि कहीं अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं या कारोबारियों से जबरन धन की मांग की जा रही है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। आखिर किन परिस्थितियों में ऐसे कारोबार फल-फूल रहे हैं? शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या संबंधित अधिकारियों को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है?
अब निगाहें नवागत पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी पर टिकी हैं। क्या वह इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराएंगे? क्या कथित वसूली के आरोपों की तह तक पहुंचकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी शिकायतों और जांच की फाइलों में दबकर रह जाएगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि निचलौल में कानून का राज चलेगा या कथित वसूली का दबदबा? एक दिव्यांग व्यक्ति को न्याय और व्यापारियों को भयमुक्त माहौल मिलना चाहिए। अब प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि इन गंभीर आरोपों पर वास्तव में कितना संज्ञान लिया जाता है।