रिपोर्ट राजीव त्रिपाठी
“जहां जल संरक्षण होना था, वहां संरक्षण में भ्रष्टाचार!”
महाराजगंज जनपद के ग्राम पंचायत सेमरी में केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा अमृत सरोवर के नाम पर चिन्हित सरकारी भूमि का बंदरबांट किया जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि को जल संरक्षण, तालाब सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संतुलन के उद्देश्य से विकसित किया जाना था, उसी भूमि को कथित रूप से अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने ढंग से बांटा जा रहा है। इससे न सिर्फ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि योजना के मूल उद्देश्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि।
बिना ग्राम सभा की खुली सहमति।बिना विधिवत सीमांकन और बिना प्रशासनिक अनुमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर आरोप को कितनी गंभीरता से लेता है, और क्या अमृत सरोवर वास्तव में जनहित की योजना बन पाएगा या फिर भ्रष्टाचार का प्रतीक बनकर रह जाएगा।