विवादित भूमि पर लिंटर डालने को लेकर हंगामा, एसडीएम के हस्तक्षेप से रुका निर्माण

रिपोर्ट/ विप्लव मद्धेशिया ठूठीबारी, महाराजगंज 

 

ठूठीबारी में पीडब्ल्यूडी और भू-स्वामियों के बीच रकबा विवाद, सोमवार को होगी संयुक्त पैमाइश

 

ठूठीबारी–निचलौल मार्ग पर चंदन नदी के समीप पुराने पेट्रोल पंप के सामने रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब निर्माणाधीन मकान में लिंटर डालने के दौरान भूमि की रकबा संख्या को लेकर विवाद गहरा गया। मामला इतना बढ़ गया कि पीडब्ल्यूडी विभाग और तीन भू-स्वामियों के बीच घंटों तक तीखी नोकझोंक होती रही, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।

भू-स्वामियों नीरज उर्फ नीरजा पत्नी हरिश्चंद्र, उर्मिला पत्नी रोहित तथा जगदीश चौहान पुत्र सूरज चौहान का कहना है कि वे रकबा संख्या 1015 में स्थित अपनी-अपनी दो-दो डिसमिल भूमि पर वैधानिक रूप से मकान निर्माण करा रहे थे। रविवार को लिंटर डालने की तैयारी चल रही थी, तभी पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर आपत्ति जता दी और निर्माण को गलत रकबा में बताया।

इस पर दोनों पक्षों के बीच दोपहर करीब एक बजे से ही बहस शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे तनावपूर्ण स्थिति में बदल गई। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता कुणाल कुमार ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य वास्तव में रकबा संख्या 1012 में किया जा रहा है, जो विभागीय अभिलेखों के अनुसार लगभग दो एकड़ छह डिसमिल क्षेत्रफल में आता है और पूरी तरह से पीडब्ल्यूडी के अधीन है।

विवाद की सूचना फैलते ही मौके पर तमाशबीनों की भारी भीड़ जुट गई। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए एसएसआई प्रणव ओझा पुलिस बल के साथ मौके पर डटे रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी।

करीब साढ़े तीन बजे उपजिलाधिकारी निचलौल सिद्धार्थ गुप्ता मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रुकवा दिया। एसडीएम ने साफ निर्देश दिया कि सोमवार को राजस्व विभाग और संबंधित विभाग की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पैमाइश कराई जाएगी। उसी के आधार पर यह तय होगा कि जमीन किसके अधिकार क्षेत्र में आती है और आगे निर्माण हो पाएगा या नहीं।

एसडीएम के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद दोनों पक्ष शांत हुए और फिलहाल विवाद टल गया। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पैमाइश के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तब तक निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक रहेगी।

इस घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती क्षेत्र में जमीन के सीमांकन और अभिलेखों की अस्पष्टता की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है, जहां छोटी-सी चूक बड़े विवाद का रूप ले लेती है। अब सभी की निगाहें सोमवार की पैमाइश पर टिकी हैं, जिससे इस लंबे चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप हो सके।

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