*भारत ने नहीं मांगा था सीजफायर, अमेरिकी दस्तावेजों ने खोली पाकिस्तान की पोल।*

Bureau Report/ Somendra Dwivedi/ New Delhi News 18 Plus /State Incharge 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका में 60 बार गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, पूर्व पेंटागन अधिकारी ने मुनीर पर किया तीखा हमला।

 

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को लेकर अब अमेरिकी दस्तावेजों से बड़ा खुलासा सामने आया है। पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर के उस दावे की हवा निकल गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने अमेरिका के जरिए युद्धविराम यानी सीजफायर की इच्छा जताई थी। अमेरिकी रिकॉर्ड बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद खुद पाकिस्तान ने अमेरिका में 60 से ज्यादा बार संपर्क साधे और मदद की गुहार लगाई।

अमेरिका के विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट, के तहत दर्ज दस्तावेजों में सामने आया है कि 6 मई से 9 मई 2025 के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी सांसदों, रक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और मीडिया संस्थानों से ताबड़तोड़ संपर्क किए। इन दस्तावेजों ने पाकिस्तान के दावों की सच्चाई उजागर कर दी है।

 

ऑपरेशन सिंदूर से घबराया पाकिस्तान

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के 9 बड़े ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने साफ किया था कि कार्रवाई केवल आतंकी अड्डों पर की गई, किसी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।

लेकिन भारतीय हमलों के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया। अमेरिकी दस्तावेज बताते हैं कि कार्रवाई शुरू होते ही पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में राजनीतिक और सैन्य गलियारों में भागदौड़ शुरू कर दी।

अमेरिका में नेताओं से लगाई गुहार

रिकॉर्ड के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रायन मास्ट, प्रतिनिधि हकीम जेफ्रीज की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विंडी पार्कर और सीनेट मेजॉरिटी लीडर जॉन थ्यून के कार्यालय से जुड़े अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की।

 

9 मई को पाकिस्तान की बेचैनी और बढ़ गई। उस दिन रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े 20 से ज्यादा संपर्क किए गए। इनमें अमेरिकी सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी और रक्षा मामलों के कई बड़े नाम शामिल थे। पाकिस्तान लगातार क्षेत्रीय तनाव और सैन्य स्थिति को लेकर अमेरिका से दखल की मांग करता रहा।

पूर्व पेंटागन अधिकारी का पाकिस्तान पर बड़ा हमला

इस पूरे मामले पर पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने पाकिस्तान पर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन की नजर में पाकिस्तान कभी स्थायी सहयोगी नहीं रहा, बल्कि केवल रणनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला देश रहा है।

 

रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान को लगता है कि वह भारत के खिलाफ फायदा उठाने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन हकीकत अलग है। उन्होंने पाकिस्तान और उसके सैन्य नेतृत्व पर बेहद कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान केवल इस्तेमाल की वस्तु है और सेना प्रमुख असीम मुनीर उसकी दलाली कर रहे हैं।

भारत ने पहले ही बता दी थी सच्चाई

भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि युद्ध रोकने की पहल पाकिस्तान की ओर से हुई थी। भारतीय पक्ष के अनुसार पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई से संपर्क किया था, जिसके बाद तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के 88 घंटे बाद साफ कहा था कि अब भारत पर होने वाला हर आतंकी हमला “युद्ध” माना जाएगा और उसका जवाब भारत अपनी शर्तों पर देगा।

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