एक साल सोना मत खरीदिए…” : नरेंद्र मोदी की अपील के पीछे 72 अरब डॉलर का बड़ा आर्थिक गणित।

Bureau Report/ Somendra Dwivedi /New Delhi News 18 Plus /State Incharge

 

तेल, सोना और विदेश खर्च से बढ़ा दबाव; विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की रणनीति पर सरकार का फोकस

 

नई दिल्ली:देश में बढ़ती महंगाई, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक साल तक सोना नहीं खरीदने” की अपील ने आर्थिक और सर्राफा बाजार में बड़ी बहस छेड़ दी है।

 

सरकार के आर्थिक आकलन के अनुसार भारत हर साल पेट्रोल-डीजल, सोना, खाने योग्य तेल और खाद जैसी जरूरी वस्तुओं के आयात पर करीब 240.7 अरब डॉलर यानी लगभग 20 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। यह देश के कुल आयात का लगभग 31 प्रतिशत है। यानी देश के हर 3 रुपये में से 1 रुपया केवल इन चार चीजों के आयात पर जा रहा है।

इसके अलावा भारतीय नागरिकों द्वारा विदेश यात्राओं पर भी करीब 31.7 अरब डॉलर यानी लगभग 2.72 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

क्यों करनी पड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपील?

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार प्रधानमंत्री की यह अपील सीधे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की रणनीति से जुड़ी हुई है।

 

बड़ी वजहें:

 

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी।

भारत को महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदना पड़ रहा है।

तेल और सोने के आयात में डॉलर की भारी खपत।

विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार दबाव बढ़ना।

रुपये की कीमत को स्थिर रखने की चुनौती।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है और इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। ऐसे में जितना ज्यादा सोना खरीदा जाएगा, उतना ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार खर्च होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटता है तो भारत के लिए कच्चा तेल, खाद और दूसरी जरूरी वस्तुएं खरीदना मुश्किल हो सकता है। इससे आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

 

एक हफ्ते में 7.79 अरब डॉलर घटा फॉरेक्स रिजर्व

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 1 मई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले वाले सप्ताह में भी करीब 4.82 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।

 

लगातार गिरावट ने सरकार और आर्थिक नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।

भारत: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है।

चौंकाने वाले आंकड़े:

देश में हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत।

 

घरेलू उत्पादन केवल 1 से 2 टन,जरूरत का 90 प्रतिशत से ज्यादा सोना आयात पर निर्भर।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात बढ़कर लगभग 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह करीब 58 अरब डॉलर था। यानी एक साल में लगभग 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

अक्टूबर 2025 में शादी सीजन की मांग के चलते भारत ने अकेले 14.7 अरब डॉलर का सोना आयात किया था।

सोना बना दूसरा सबसे बड़ा आयात बोझ

भारत के कुल आयात बिल में सोने की हिस्सेदारी करीब 9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कच्चे तेल के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा आयात खर्च बन चुका है।

यही वजह है कि सरकार अब सोने की खरीद को नियंत्रित करने और घरेलू निवेश को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है।

 

बैंकों ने घटाया आयात, 30 साल के निचले स्तर पर पहुंच सकता है गोल्ड इंपोर्ट

सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार द्वारा 3 प्रतिशत इंटीग्रेटेड जीएसटी लागू किए जाने के बाद कई बैंकों ने सोने का आयात कम कर दिया है।

इसी कारण अप्रैल महीने में भारत का गोल्ड इंपोर्ट लगभग 30 वर्षों के न्यूनतम स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

 

1.50 लाख रुपये के पार सोना, फिर भी खरीदारी जारी

देश में सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं।

फिलहाल सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर कारोबार कर रहा है।

जनवरी 2026 के आखिर में कीमतें लगभग 1.90 लाख रुपये तक पहुंच गई थीं।

ऊंची कीमतों के कारण कुछ समय के लिए बिक्री प्रभावित हुई, लेकिन शादी सीजन शुरू होते ही बाजार में फिर तेजी लौट आई।

 

सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक कीमतों में सालाना 40 प्रतिशत से अधिक तेजी के बावजूद शादी के मौसम में सोने की बिक्री 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

 

ज्वेलर्स की बढ़ी चिंता

प्रधानमंत्री की अपील के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ गई है कि यदि लोग कुछ समय तक सोना खरीदने से बचते हैं तो कीमतों में गिरावट आ सकती है।

इससे पहले ही महंगे सोने और कमजोर मांग से जूझ रहे ज्वेलर्स की चिंता और बढ़ गई है।

क्या है सरकार का बड़ा संदेश?

सरकार का स्पष्ट संकेत है कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौर में “जरूरी आयात” को प्राथमिकता देना समय की मांग है।

 

आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि सोने की आयात निर्भरता कम होती है तो भारत विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने के साथ रुपये को स्थिर रखने में भी सफल हो सकता है।

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