Bureau Report /News 18 Plus /Maharajganj
लाइसेंस बनवाने के नाम पर सरकारी शुल्क से 5 से 6 हजार रुपये अधिक वसूलने का आरोप, आरआई और टेंडर संचालक की मिलीभगत पर उठाए सवाल; कार्यालय परिसर में जमकर हुई नारेबाजी।
महराजगंज। जनपद मुख्यालय स्थित सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय में कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद अधिवक्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा। लाइसेंस बनवाने के नाम पर निर्धारित सरकारी शुल्क से हजारों रुपये अधिक वसूले जाने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यालय परिसर में जमकर नारेबाजी की गई और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई गई।
प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का आरोप है कि एआरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया के दौरान आम लोगों से निर्धारित सरकारी शुल्क के अतिरिक्त लगभग 5 से 6 हजार रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी कार्यालय में काम कराने के लिए आम नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। निर्धारित शुल्क और कथित तौर पर वसूली जा रही रकम में भारी अंतर होने के बावजूद इस व्यवस्था पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।
अधिवक्ताओं ने इस पूरे मामले में कार्यालय के आरआई (संभागीय निरीक्षक) और टेंडर संचालक के बीच कथित मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि लाइसेंस संबंधी कार्यों में निर्धारित सरकारी शुल्क के अतिरिक्त धनराशि ली जा रही है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अधिवक्ताओं ने एआरटीओ कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कथित घूसखोरी की शिकायत की।
विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कार्यालय में व्याप्त कथित अनियमितताओं को लेकर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि सरकारी कार्यालयों का उद्देश्य आम जनता को पारदर्शी और सुगम सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि लाइसेंस जैसे आवश्यक कार्य के लिए लोगों को अतिरिक्त रकम देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है तो यह गंभीर जांच का विषय है।
मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि एआरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनाने के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क और वास्तविक रूप से वसूली जा रही धनराशि का मिलान कराया जाए। कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच, शुल्क जमा करने के अभिलेखों का सत्यापन तथा संबंधित कर्मचारियों और टेंडर संचालक की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, शिकायत सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आम जनता को सरकारी परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने वाले कार्यालय में कथित अतिरिक्त वसूली के आरोपों की जांच कब शुरू होगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या नहीं? फिलहाल अधिवक्ताओं के विरोध और जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
वसूली और मिलीभगत से जुड़े आरोप अधिवक्ताओं की शिकायत पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना शेष है।