काराखास कांड में बड़ा एक्शन या बलि का बकरा? ईमानदार सिपाही बृजेश गुप्ता सस्पेंड, निचलौल पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल।

न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो: दिलीप कुमार पाण्डेय 

 

ठूठीबारी-निचलौल काराखास प्रकरण ने खोली पुलिसिया सिस्टम की परतें, कार्रवाई पर जनता में आक्रोश!

 

महराजगंज जनपद के निचलौल थाना क्षेत्र के काराखास प्रकरण ने पुलिस विभाग के भीतर चल रही कार्यप्रणाली और कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक मामले में सस्पेंशन ऑर्डर जारी करते हुए छोटे हल्के के सिपाही बृजेश गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। क्षेत्र में बृजेश गुप्ता एक ईमानदार, शांत स्वभाव और जनता से बेहतर व्यवहार रखने वाले पुलिसकर्मी के रूप में जाने जाते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

 

लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पूरे प्रकरण में केवल एक सिपाही पर कार्रवाई क्यों? क्या बड़े जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी? या फिर सिस्टम में छोटे कर्मचारियों को ही आसान निशाना बनाया जाता रहेगा?

 

कार्रवाई पर उठे सवाल, फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझा

 

बताया जाता है कि दिनांक 02 जून 2026 को शाम 3:52 बजे न्यूज़ 18प्लस के संवाददाता द्वारा ट्विटर हैंडल के माध्यम से कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन महोदय ने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इससे मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

एसपी शक्ति मोहन अवस्थी के सख्त रवैये से विभाग में बढ़ी बेचैनी

 

जनपद में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के आगमन के बाद अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक सख्ती को लेकर पुलिस विभाग में हलचल तेज हुई है। उनके तेज कार्यशैली और अनुशासनात्मक रवैये के चलते कई अधिकारियों में खौफ का माहौल बताया जा रहा है। लगातार बड़े फेरबदल और सख्त निर्देशों के बावजूद कुछ अधिकारी अपनी पुरानी कार्यशैली और व्यवहार से बाज नहीं आ रहे हैं।

 

जांच हुई, लेकिन बड़े जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

 

सूत्रों के अनुसार काराखास मामले की जांच निचलौल क्षेत्राधिकारी अनिरुद्ध पटेल द्वारा की गई, लेकिन अब तक ठूठीबारी काराखास और निचलौल काराखास से जुड़े बड़े जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। ऐसे में विभागीय निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

 

थाना प्रभारी अंकित सिंह पहले भी विवादों में रहे

 

निचलौल थाना प्रभारी अंकित सिंह का नाम इससे पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। झूलनीपुर सीमा क्षेत्र में अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। इतना ही नहीं, सोनौली कोतवाली में तैनाती के दौरान फरियादियों से अभद्र व्यवहार और अपशब्द कहने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।

 

वायरल वीडियो के बाद हुई थी कार्रवाई

 

बताया जाता है कि 05 मार्च 2025 को वायरल हुए वीडियो के बाद पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लेते हुए अंकित सिंह को सस्पेंड नहीं बल्कि लाइन हाजिर किया था। हालांकि उस समय भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे कि क्या केवल लाइन हाजिर करना पर्याप्त था?

 

जनता पूछ रही — क्या फाइलों में दब जाएगा मामला?

 

अब काराखास प्रकरण में एक सिपाही के सस्पेंशन के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या विभाग बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करेगा या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा? जनता निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रही है ताकि पुलिस विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे।

 

ठूठीबारी और निचलौल काराखास बना चर्चा का केंद्र

 

सीमावर्ती क्षेत्र ठूठीबारी काराखास और निचलौल काराखास इस पूरे प्रकरण के बाद चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस विभाग की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है।

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