निचलौल थाना रोड चिउटहा तिराहा पर विवाद में राहगीरों ने कराया समझौता, नए थाना प्रभारी के कार्यकाल पर उठे बड़े सवाल!

ब्यूरो रिपोर्ट/ दिलीप कुमार पाण्डेय, संवाददाता

न्यूज़ 18 प्लस, 

 

निचलौल में ‘सिस्टम फेल’! पुलिस नदारद, सड़क पर खुद ‘न्याय’ करने लगे लोग।

महराजगंज जनपद के निचलौल थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। चिउटहा चौराहे पर फल व्यापारी और ग्राहक के बीच हुए मामूली विवाद ने अचानक तूल पकड़ लिया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मौके पर पुलिस का कोई अता-पता नहीं था। हालात इतने बिगड़ गए कि राहगीरों को ही ‘न्यायाधीश’ बनकर बीच-बचाव करना पड़ा और मामला शांत कराना पड़ा।

 

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि आम लोग खुद ही विवाद सुलझा रहे हैं, जबकि पुलिस पूरी तरह गायब है। सवाल यह है कि क्या निचलौल पुलिस अब सिर्फ कागजों और दावों तक सीमित रह गई है?

 

 

दावों की पोल खुली: गश्त और चेकिंग सिर्फ दिखावा?

 

एक ओर पुलिस प्रशासन हूटर, ब्लैक फिल्म और वाहन चेकिंग के नाम पर सघन अभियान चलाने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील मौके पर उसकी अनुपस्थिति इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। ज़मीनी हकीकत यह है कि जहां जरूरत है, वहां पुलिस नजर नहीं आती।

 

नए थाना प्रभारी के कार्यकाल पर सवालों की बौछार

 

ठूठीबारी काराखास और नए थाना प्रभारी अमित सिंह के पदभार ग्रहण करते ही इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप लग रहे हैं कि थाने के इर्द-गिर्द ‘कारखास सिस्टम’ हावी है, जहां कई मामलों का निस्तारण पर्दे के पीछे से किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे-बड़े मामलों का ‘रेट’ तक तय होने की बातें सामने आ रही हैं।

 

पहले सख्ती, अब ढील? अवैध कारोबार फिर सक्रिय

 

सूत्र बताते हैं कि पूर्व थाना प्रभारी अखिलेश वर्मा के कार्यकाल में अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगी थी। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में अवैध कारोबार के फिर से सक्रिय होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिससे पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

 

पत्रकारों से भी ‘अजीब व्यवहार’

 

पुलिस की कार्यशैली पर एक और सवाल तब खड़ा हुआ जब आरोप लगे कि पत्रकारों को आधिकारिक नंबर की बजाय निजी नंबरों पर संपर्क करने के लिए कहा जाता है। यहां तक कि ट्रूकॉलर पहचान को लेकर भी टिप्पणी की जाती है। यह रवैया पुलिस की पेशेवर छवि पर सवालिया निशान लगा रहा है।

 

सुरक्षा पर संकट, जिम्मेदारी किसकी?

 

इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। आशंका जताई जा रही है कि यदि भविष्य में कोई अनहोनी या अवैध घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे संबंधित थाना प्रभारियों पर होगी।

 

जनता के सवाल, प्रशासन खामोश

 

सबसे बड़ा सवाल अब यही है—

 

– क्या निचलौल पुलिस अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रही है?

– क्या आम जनता को ही अब कानून-व्यवस्था संभालनी पड़ेगी?

– क्या ‘कारखास सिस्टम’ ही असली थाना चला रहा है?

जनता जवाब चाहती है…

अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और इन सवालों का जवाब देता है।

 

(न्यूज़ 18 प्लस – सच के साथ)

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