Bureau Report/ News Correspondent /News 18 Plus Bureau /Nichlaul
कमिश्नर कोर्ट (गोरखपुर) से निचली अदालत का फैसला निरस्त होने के बाद भी थानेदार और एसडीएम पर मिलीभगत के गंभीर आरोप, ‘स्वीट प्वाइजन’ थानेदार की वसूली और हनक से सहमे असली अधिवक्ता।
महराजगंज/निचलौलउत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद अंतर्गत निचलौल और कोठीभार क्षेत्र में कार्यपालिका, न्यायपालिका और खाकी के कथित गठजोड़ ने कानून व्यवस्था का जनाजा निकाल दिया है। सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारियों के अनुसार, निचलौल में सक्रिय एक कथित ‘दलाल एडवोकेट’ ने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट तैयार कर लिया है, जो सीधे तौर पर उच्च न्यायालयों और राजस्व परिषदों के आदेशों को खुली चुनौती दे रहा है। पीड़ित पक्षों और स्थानीय असली अधिवक्ताओं में इस बेलगाम हुकूमत को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।
मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि हाल ही में अपर आयुक्त (न्यायिक) द्वितीय, गोरखपुर मंडल, राजेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत (वाद संख्या 1019/2026, राजकुमार बनाम दिवाकर आदि, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 207) ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत (एसडीएम/सीडीएम) द्वारा पारित 11-05-2026 के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया था, जिसके तहत नियमों (नियमावली 107(4)) की धज्जियां उड़ाकर एक पक्षीय लाभ पहुंचाया गया था। ऊपरी अदालत ने मामले को वापस भेजकर गुण-दोष के आधार पर निष्पक्ष सुनवाई का स्पष्ट निर्देश दिया था।
लेकिन निचलौल में कानून का राज नहीं, बल्कि अफसरों और कथित दलालों का ‘सिंडिकेट’ चल रहा है। ऊपरी अदालत द्वारा आदेश निरस्त किए जाने के बावजूद, कथित एडवोकेट के रसूख और प्रशासनिक सांठगांठ के बल पर धरातल पर न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर न्यायालय के स्पष्ट रुख की अवहेलना करते हुए मौके पर जबरन निर्माण कार्य जारी रखने का भारी दबाव बनाया गया, जिसे स्थानीय थाना प्रभारी ने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया।
जेब में तीन थाने, हुकूमत बेकाबू!सूत्रों की मानें तो कथित एडवोकेट की पकड़ सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन-तीन थानों पर है। क्षेत्र में कहीं हत्या हो, छेड़खानी हो या जानलेवा मारपीट—हर गंभीर मुकदमे को ‘मैनेज’ करने का ठेका इसी कथित चेहरे के पास है। थानों में सेटिंग के जरिए मोटी वसूली तेज है, जबकि निष्पक्ष कार्रवाई पूरी तरह शून्य हो चुकी है।
स्वीट प्वाइजन’ थानेदार की हनक चर्चा है कि मौजूदा थानेदार का मिजाज ‘मीठा जहर’ (Sweet Poison) जैसा है। जुबान बेहद मीठी, लेकिन करतूतें उतनी ही घातक। आरोप है कि न्याय की आवाज उठाने वालों और सच लिखने वालों के खिलाफ ही छोटा मुकदमा बताकर फर्जी केस दर्ज करने की धमकियां दी जा रही हैं। यह इनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड रहा है—पहले थाने में भी यही खेल, दूसरे में भी यही और अब तीसरे में भी वही तानाशाही!
स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि कथित एडवोकेट का अधिकारियों के साथ कोई कानूनी या नैतिक रिश्ता नहीं है, लेकिन पारिवारिक उठना-बैठना, दावतें और लंबी दूरियों का सफर एक ही गाड़ी में एक साथ तय करना आम बात हो चुकी है। इसी ‘पारिवारिक सेटिंग’ की आड़ में पूरे निचलौल की न्याय व्यवस्था को बंधक बना लिया गया है। कार्यपालिका और पुलिस महकमे के इस अलोकतांत्रिक रवैये से आहत होकर अब पीड़ित पक्ष उच्चाधिकारियों सहित शासन स्तर पर इस पूरे सिंडिकेट की शिकायत भेजने की तैयारी में है। देखना यह है कि योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस के दावों के बीच इस ‘स्वीट प्वाइजन’ नेटवर्क पर कब और क्या कार्रवाई होती है।
संलग्न साक्ष्य संदर्भ (आदेश पत्र): वाद संख्या: 1019/2026 (राजकुमार बनाम दिवाकर आदि), कंप्यूटर कोड C202605000001019, अपर आयुक्त कोर्ट, गोरखपुर।