*नेपाल की आपदा के बाद नारायणी में बहकर आए चार शव, कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नेपाल को सौंपे गए!*

Bureau Report /Rajiv Tripathi /Nichlaul News 18 Plus /Co-Editor 

 

तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल, 72 घंटे तक पहचान का इंतजार; डीएनए सैंपल सुरक्षित।

 

 

महराजगंज। नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद नारायणी नदी के रास्ते भारतीय सीमा क्षेत्र में पहुंचे चार अज्ञात शवों को महराजगंज प्रशासन ने सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नेपाल प्रशासन को सौंप दिया है। मृतकों में तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। चारों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है।

 

निचलौल क्षेत्र के टेलफाल के समीप स्थानीय लोगों ने नारायणी नदी में शवों को बहते देखा था। सूचना मिलते ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। मौके पर पहुंची एसएसबी और एसडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाकर नदी से चारों शवों को बाहर निकाला।

 

72 घंटे तक नहीं पहुंचा कोई दावेदार

 

शव बरामद होने के बाद उनकी पहचान तत्काल नहीं हो सकी। प्रशासन ने चारों शवों को सुरक्षित रूप से महराजगंज जिला अस्पताल के मोर्चरी हाउस में रखवाया और नियमानुसार उनकी पहचान तथा परिजनों के दावे के लिए 72 घंटे तक इंतजार किया गया।

 

इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर मृतकों की पहचान कराने के प्रयास किए गए, लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर किसी भी व्यक्ति ने शवों पर दावा नहीं किया। इसके बाद प्रशासन ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।

 

पोस्टमार्टम के साथ सुरक्षित किए गए डीएनए सैंपल

 

पहचान की संभावना को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से 72 घंटे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चारों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान मृतकों के डीएनए सैंपल भी सुरक्षित किए गए हैं।

 

प्रशासन का मानना है कि यदि भविष्य में नेपाल में कोई परिवार इन शवों को लेकर दावा करता है, तो डीएनए जांच के माध्यम से मृतकों की पहचान की पुष्टि की जा सकेगी। इससे शवों को उनके वास्तविक परिजनों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

 

भारत-नेपाल प्रशासन के बीच बना रहा समन्वय

 

चारों शव मिलने के बाद से ही महराजगंज प्रशासन नेपाल प्रशासन और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के लगातार संपर्क में रहा। प्रारंभिक तौर पर शवों के नेपाल क्षेत्र से नदी में बहकर भारतीय सीमा तक पहुंचने की आशंका जताई गई थी।

 

अपर जिलाधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि चारों शवों से संबंधित सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गईं, जिसके बाद उन्हें नेपाल प्रशासन को सुपुर्द कर दिया गया।

 

ठूठीबारी बॉर्डर से नेपाल भेजे गए शव

 

चारों शवों को एंबुलेंस के माध्यम से ठूठीबारी सीमा के रास्ते नेपाल भेजा गया। सीमा पार करने के बाद नेपाल पुलिस ने एंबुलेंस को सुरक्षा प्रदान की और उसे एस्कॉर्ट करते हुए आगे रवाना किया।

 

जानकारी के अनुसार, शवों को लेकर जा रही एंबुलेंस को सुरक्षा व्यवस्था के बीच महेशपुर सशस्त्र प्रहरी पुलिस, नवलपरासी तक पहुंचाया गया। अब मृतकों की पहचान कराने और उनके परिजनों का पता लगाने की जिम्मेदारी नेपाल प्रशासन की होगी।

 

डीएनए जांच से खुल सकती है मृतकों की पहचान

 

फिलहाल चारों शवों की पहचान एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, सुरक्षित किए गए डीएनए सैंपल भविष्य में मृतकों की पहचान के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। नेपाल प्रशासन अब अपने स्तर से संभावित परिवारों की तलाश करेगा और आवश्यकता पड़ने पर डीएनए जांच के जरिए पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

 

नेपाल की प्राकृतिक आपदा के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में सामने आया यह मामला एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा पर प्रशासनिक और मानवीय समन्वय की अहमियत को दर्शाता है।

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