रिपोर्ट ब्यूरो ठूठीबारी महराजगंज
महराजगंज/ठूठीबारी: जिले के ठूठीबारी थाना क्षेत्र में अवैध तस्करी को लेकर पुलिस महकमे के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का विरोधाभास अब सुर्खियों में है। एक तरफ जहां महराजगंज पुलिस यह दावा करती है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तस्करी का कारोबार पूरी तरह ठप है, वहीं दूसरी ओर विदेशी (नेपाली) पुलिस द्वारा भारतीय सीमा के भीतर आकर तस्करी की खेप पकड़े जाने की घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
सीमा पर पुलिस के दावों की पोल:
महराजगंज पुलिस का यह दावा कि बार्डर पर कोई तस्करी नहीं चल रही है, तब खोखला साबित हो गया जब बीते 19 सितंबर 2026 को नेपाली पुलिस ने भारतीय बार्डर लाईन के अंदर घुसकर तस्करी की खेप को दबोच लिया। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि यदि स्थानीय पुलिस महकमा सतर्क होता, तो दूसरे देश की पुलिस को भारतीय सीमा के भीतर आकर कार्रवाई करने की जरूरत नहीं पड़ती।
काराखास बलवंत यादव और थानाध्यक्ष की भूमिका पर गंभीर आरोप:
सूत्रों के अनुसार, ठूठीबारी थाने में लगभग चार वर्षों से जमे काराखास बलवंत यादव की कार्यशैली इस पूरे सिंडिकेट के केंद्र में बताई जा रही है। आरोप है कि थाने के संरक्षण में बड़े-बड़े तस्करों से सांठ-गांठ करके सारी ‘डील’ बलवंत यादव द्वारा ही संचालित की जाती है।
कबाड़ी सिंडिकेट से लेकर अन्य कई अवैध सिंडिकेट्स तक का नेटवर्क पगडंडी के गुप्त रास्तों के जरिए संचालित होता है, जिसके माध्यम से तस्करी के माल सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाए जाते हैं। जानकारों का कहना है कि बिना ठूठीबारी थानाध्यक्ष अमित सिंह और काराखास बलवंत यादव की मिलीभगत के इस तरह के अवैध खेल का इतने बड़े पैमाने पर चलना नामुमकिन है।
प्रशासनिक सुस्ती और उच्च अधिकारियों की चुप्पी:
लंबे समय से एक ही थाने में जमे रहने वाले कर्मियों के कारण पुलिस की छवि धूमिल हो रही है। आम जनता और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि महराजगंज पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी इस पर पर्दा डालने में लगे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जिले के उच्च अधिकारी ठूठीबारी थानाध्यक्ष अमित सिंह और लंबे समय से जमे काराखास बलवंत यादव की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराते हैं या फिर मामले को यूं ही दबा दिया जाता है।