Bureau Report /News 18 Plus /Nichlaul
मनीष सिंह और बलवंत यादव की तैनाती को लेकर उठे सवालों पर सीओ रविंद्र सिंह को सौंपी गई जांच, अब धरातल पर कार्रवाई का इंतजार।
महराजगंज। निचलौल और ठूठीबारी थाने में तैनात आरक्षी मनीष सिंह और बलवंत यादव की लंबे समय से चली आ रही तैनाती को लेकर उठे सवालों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने मामले की जांच क्षेत्राधिकारी रविंद्र सिंह को सौंपी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जांच केवल कागजों और सोशल मीडिया पर उठ रही चर्चाओं तक सीमित रहेगी या धरातल पर भी निष्पक्ष पड़ताल होगी?
दोनों आरक्षियों की तैनाती को लेकर करीब 3 साल 9 महीने का आंकड़ा चर्चा में है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि लंबे समय से एक ही थाने में तैनाती को लेकर आपत्तियां सामने आ रही हैं, तो अब तक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई? क्या पुलिस प्रशासन निर्धारित नियमों और स्थानांतरण व्यवस्था के अनुरूप तैनाती की समीक्षा करेगा या जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
बीट ड्यूटी की ईमानदारी या प्रभावशाली पकड़?
दोनों आरक्षियों के बारे में बीट ड्यूटी ईमानदारी से करने की बातें भी सामने आती रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि बीट ड्यूटी का निर्वहन और लंबे समय तक एक ही थाने में तैनाती—क्या इन दोनों पहलुओं की अलग-अलग समीक्षा होगी? यदि किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है, तो जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने चाहिए, ताकि बेवजह उठ रहे सवालों पर विराम लग सके।
वहीं, पुलिस महकमे में कथित ‘कारखास’ व्यवस्था को लेकर भी चर्चा है। आरोपों और चर्चाओं की सच्चाई जांच का विषय है। ऐसे में यह जरूरी है कि जांच केवल संबंधित आरक्षियों के बयान तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी वास्तविक ड्यूटी, तैनाती की अवधि, जिम्मेदारियों और उपलब्ध अभिलेखों की निष्पक्ष पड़ताल भी की जाए।
एसपी के एक्शन पर टिकी निगाहें
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या क्षेत्राधिकारी रविंद्र सिंह की जांच में तैनाती से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा होगी? क्या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर कार्रवाई होगी? या फिर जांच रिपोर्ट फाइलों में दबकर रह जाएगी?
जनता का सवाल सीधा है—जब तैनाती को लेकर सवाल उठ चुके हैं, तो जांच का परिणाम सामने आने में देरी क्यों? पुलिस की निष्पक्षता केवल आदेश जारी करने से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई से साबित होती है।
फिलहाल, दोनों आरक्षियों के विरुद्ध किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना जरूरी है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन सवालों का जवाब कार्रवाई से देता है या मामला केवल जांच के आदेश तक ही सिमटकर रह जाता है।