रिपोर्ट राकेश त्रिपाठी प्रधान संपादक
निजी निवेश और कारोबारी संबंधों पर उठे सवाल, जनता और विपक्ष के दबाव में झुकी सरकार।
नेपाल की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब देश के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। महज 26 दिनों के छोटे से कार्यकाल के बाद उनका यह इस्तीफा न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि नेपाल की मौजूदा सरकार के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
गौरतलब है कि गुरुंग को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त और आक्रामक रुख अपनाने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन उन्हीं के ऊपर लगे गंभीर आरोपों ने उनकी छवि को गहरा धक्का पहुंचाया।
क्या हैं आरोप?
सूत्रों के मुताबिक, सुदन गुरुंग पर विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक साझेदारी रखने के आरोप लगे। इसके अलावा माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में उनके संदिग्ध निवेश को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
इन आरोपों के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया, वहीं सोशल मीडिया और आम जनता में भी भारी नाराज़गी देखने को मिली।
बढ़ता दबाव और विरोध
जैसे-जैसे मामले ने तूल पकड़ा, सड़कों से लेकर संसद तक विरोध की आवाज़ें तेज होती गईं। सरकार की छवि पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए गुरुंग पर इस्तीफे का दबाव लगातार बढ़ता गया।
आखिरकार, बढ़ते विवाद और चौतरफा आलोचना के बीच उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर इस राजनीतिक संकट को और गहराने से रोकने की कोशिश की।
बालेन सरकार पर असर
गुरुंग का इस्तीफा सीधे तौर पर बालेन सरकार की साख पर सवाल खड़े करता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार के एक अहम मंत्री पर ही इस तरह के आरोप लगना, शासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले समय में नेपाल की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है और सरकार को अपनी छवि सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
निष्कर्ष:
महज 26 दिन में गृहमंत्री का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि नेपाल में अब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जनता और विपक्ष दोनों ही ज्यादा सतर्क और आक्रामक हो चुके हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, जिससे सरकार के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।