Bureau Report /News 18 Plus /Nichlaul
पुलिस अभियान से पहले सूचना पहुंचने की चर्चाएं तेज, अवैध कारोबार और दुकानों से कथित वसूली के आरोप; निचलौल प्रभारी योगेंद्र राय बोले—ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं, कप्तान को देंगे लिखित शिकायत।
महराजगंज। जिले के सीमावर्ती और संवेदनशील थाना क्षेत्रों निचलौल और ठूठीबारी में कथित ‘कारखास’ व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। निचलौल में मनीष सिंह और ठूठीबारी में बलवंत यादव की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से तरह-तरह की चर्चाएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि दोनों की अपने-अपने थाना क्षेत्रों में ऐसी पकड़ है कि कई मामलों में थाना स्तर की गतिविधियों और संभावित पुलिस कार्रवाई की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंचने की चर्चा रहती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष भी इस खबर के प्रकाशन तक सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस कार्रवाई से पहले सूचना पहुंचने का आरोप
क्षेत्र में चर्चा का सबसे गंभीर पहलू कथित सूचना-लीक को लेकर है। आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि पुलिस द्वारा किसी संदिग्ध गतिविधि या अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान शुरू किए जाने से पहले ही कुछ स्थानों और कारोबारियों को कार्रवाई की भनक लग जाती है।
यदि ऐसा होता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि पुलिस की कार्रवाई से संबंधित जानकारी आखिर बाहर कैसे पहुंचती है और थाना स्तर पर संवेदनशील सूचनाओं की निगरानी किस तरह की जाती है।
दुकानों और कथित अवैध कारोबार से ‘सेटिंग’ के आरोप
स्थानीय चर्चाओं में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कथित रूप से कुछ दुकानों, होटलों और अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ ‘सेटिंग’ के जरिए आर्थिक लेन-देन किया जाता है। कुछ लोग कथित तौर पर महीने के हिसाब से वसूली किए जाने का भी दावा कर रहे हैं।
इन चर्चाओं में अवैध शराब, गांजा और अनैतिक गतिविधियों से जुड़े कुछ ठिकानों का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित दस्तावेज या प्रमाण सार्वजनिक नहीं है।
‘कारखास’ पद नहीं, फिर किसकी जिम्मेदारी?
‘कारखास’ शब्द को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस विभाग में यह कोई औपचारिक पद नहीं है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को अनौपचारिक रूप से ऐसी भूमिका दी जाती है या वह स्वयं थाना क्षेत्र में प्रभावशाली भूमिका निभाता है, तो उसकी जिम्मेदारी और अधिकारों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि कोई व्यक्ति थाना प्रभारी की औपचारिक जिम्मेदारी में नहीं है, तो उसे थाने की अंदरूनी गतिविधियों, संभावित कार्रवाई अथवा अभियान से संबंधित जानकारी कैसे मिलती है?
निचलौल थाना प्रभारी ने कही सख्ती की बात
मामले को लेकर निचलौल थाना प्रभारी योगेंद्र राय ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार की शिकायत या गतिविधि सामने आती है तो इसकी जानकारी पुलिस अधीक्षक को लिखित रूप से दी जाएगी।
थाना प्रभारी के इस रुख के बाद अब सवाल यह है कि क्या कथित ‘कारखास’ व्यवस्था को लेकर सामने आ रही शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच होगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
नवागत एसपी के सामने चुनौती
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के सामने अब यह मामला पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता और थाना स्तर की जवाबदेही से जुड़ा सवाल बनता दिखाई दे रहा है। यदि पुलिस अभियान से पहले सूचना लीक होने की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह केवल किसी एक व्यक्ति की भूमिका का मामला नहीं होगा, बल्कि पूरे सूचना तंत्र और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा का विषय बन सकता है।
क्षेत्र में उठ रहे सवालों का जवाब जांच से ही मिल सकता है—क्या वास्तव में किसी अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों तक पुलिस कार्रवाई की जानकारी पहुंचती है? क्या किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन होता है? और यदि होता है तो इसके पीछे कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं?
फिलहाल निचलौल के मनीष सिंह और ठूठीबारी के बलवंत यादव को लेकर उठ रही चर्चाओं ने पुलिस महकमे की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस विभाग इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं।
खबर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।