*ठूठीबारी में ‘कारखास’ और कबाड़ी नेटवर्क पर गंभीर सवाल!*

Bureau Report /News 18 Plus /Thuthibari 

इशारों पर चलती है ‘हुकूमत’ या महज अफवाह? पुलिसिंग के बीच कथित सिंडिकेट की चर्चा ने खड़े किए बड़े सवाल?

 

सूत्रों का दावा—नेपाल से लेकर चीन तक फैला है नेटवर्क, ‘कारखास’ के जरिए सूचनाओं के आदान-प्रदान और मामलों के निपटारे के आरोप!

 

 

महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे ठूठीबारी थाना क्षेत्र में इन दिनों कथित ‘कारखास-कबाड़ी नेटवर्क’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय स्तर पर तरह-तरह के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि कबाड़ कारोबार से जुड़े कुछ लोगों का नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पहुंच नेपाल सीमा से आगे तक होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वह कौन-सा तंत्र है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि ‘कारखास’ के जरिए थाना क्षेत्र की गतिविधियों की सूचनाएं पहुंचती हैं और पुलिस की कार्रवाई से पहले ही संबंधित लोगों को भनक लग जाती है?

 

‘कारखास’ की भूमिका पर क्यों उठ रही उंगली?

 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, थाना क्षेत्र में कथित रूप से सक्रिय ‘कारखास’ की भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चा है। आरोप है कि क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों, विवादों और कुछ मामलों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में उसकी भूमिका रहती है। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों को प्रभावित करने अथवा निपटाने के लिए कथित रूप से बिचौलिये की भूमिका निभाई जाती है।

 

यदि ये आरोप सही हैं तो यह सीधे तौर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। आखिर किसी थाने की कार्रवाई कानून और पुलिस नियमों से चलेगी या किसी बाहरी व्यक्ति के इशारे पर?

कबाड़ी नेटवर्क को लेकर भी गंभीर दावे

सूत्रों का दावा है कि कथित कबाड़ी नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा है। इसमें सीमा क्षेत्र में होने वाली कबाड़ की खरीद-फरोख्त से लेकर उसके आगे भेजे जाने तक की गतिविधियां शामिल होने की बात कही जा रही है। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि नेटवर्क की कड़ियां नेपाल तक जुड़ी हैं और इससे आगे भी संपर्क होने की चर्चा है।

हालांकि नेपाल से लेकर चीन तक नेटवर्क फैले होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है।

लक्ष्मीपुर चौकी पर भी सवाल

ठूठीबारी थाना क्षेत्र की लक्ष्मीपुर चौकी की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों का आरोप है कि कथित कबाड़ी नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ चौकी स्तर पर जरूरत से ज्यादा नजदीकी दिखाई देती है और कई मामलों में उनकी बात को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है।

यदि ऐसा है तो पुलिस प्रशासन को इसकी जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि चौकी की कार्रवाई किसी व्यक्ति अथवा कारोबारी समूह के प्रभाव में तो नहीं चल रही।

 

रात की रंगीन महफिलों’ की चर्चा भी तेज

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कबाड़ कारोबार से जुड़े कुछ लोगों की कथित रूप से रात में होने वाली गतिविधियों को लेकर पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। हालांकि इन आरोपों के संबंध में भी कोई स्वतंत्र एवं पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।

 

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो जांच से परेशानी किसे होनी चाहिए?

 

अंतरजनपदीय स्थानांतरण के बावजूद जमे रहने की चर्चा

 

ठूठीबारी थाने के प्रभारी अमित सिंह को लेकर भी स्थानीय स्तर पर स्थानांतरण संबंधी चर्चाएं लगातार चल रही हैं। आरोप है कि अंतरजनपदीय स्थानांतरण के आदेशों के बावजूद उनके पद पर बने रहने को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।

 

यदि वास्तव में स्थानांतरण संबंधी कोई सक्षम आदेश प्रभावी है, तो पुलिस विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि संबंधित अधिकारी की तैनाती किस आधार पर जारी है और आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ।

 

एडीजी के आदेश और थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल

 

पुलिस विभाग में उच्चाधिकारियों के आदेशों का अनुपालन अधीनस्थ अधिकारियों के लिए अनिवार्य होता है। ऐसे में यदि स्थानांतरण या अन्य प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन को लेकर कोई विसंगति है तो यह महज एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बन जाता है।

 

अब निगाहें पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी पर हैं कि वह इन चर्चाओं और आरोपों को किस गंभीरता से लेते हैं और क्या किसी स्तर पर जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं।

 

क्या सच में ‘कारखास’ चला रहा है थाना?

 

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ठूठीबारी थाने की पुलिसिंग कानून और नियमों के मुताबिक हो रही है या फिर किसी कथित ‘कारखास’ के जरिए सूचनाओं और गतिविधियों का संचालन हो रहा है?

 

अगर आरोप निराधार हैं तो पुलिस प्रशासन को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि आरोपों में जरा भी सच्चाई है तो पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए।

 

सीमा क्षेत्र होने के कारण ठूठीबारी में कबाड़, तस्करी, अवैध आवागमन और अन्य गतिविधियों पर पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी जरूरी है। ऐसे में किसी भी कथित सिंडिकेट को लेकर उठने वाले सवालों को नजरअंदाज करना सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर विषय हो सकता है।

 

अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन आरोपों को महज अफवाह मानकर खारिज करता है या फिर ‘कारखास-कबाड़ी नेटवर्क’ की तह तक पहुंचकर यह पता लगाता है कि आखिर ठूठीबारी में पर्दे के पीछे कौन-कौन से चेहरे सक्रिय हैं।

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