Bureau Report /Anubhav Patel /Nichlaul Correspondent /News 18 Plus
दुकान में घुसकर मारपीट, लूट और फिर समझौते का कथित दबाव—गरीब पीड़ित को न्याय मिलेगा या व्यवस्था फिर कटघरे में होगी?
महराजगंज जनपद के निचलौल थाना क्षेत्र के ग्राम आर्दौना में हुई कथित मारपीट और लूट की घटना अब पुलिस विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। मामले में लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जांच क्षेत्राधिकारी (सीओ) निचलौल को सौंप दी गई है, जिससे पूरे महकमे में हलचल तेज हो गई है।
पीड़ित विशाल गौड़ का आरोप है कि 19 जून 2026 की शाम लगभग सात बजे गांव के कुछ दबंग पुरानी रंजिश के चलते उसकी दुकान में घुस आए। कथित तौर पर लोहे की रॉड से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल किया गया और काउंटर में रखे लगभग 35 हजार रुपये लेकर फरार हो गए। इतना ही नहीं, शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
एफआईआर के बजाय तहरीर बदलने का दबाव?
पीड़ित का आरोप है कि न्याय की उम्मीद लेकर जब वह निचलौल थाने पहुंचा तो कार्रवाई के बजाय उस पर ही तहरीर बदलने का दबाव बनाया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि थाना प्रभारी अंकित सिंह ने अभद्र व्यवहार किया और मामले को कमजोर करने की कोशिश की।
यही नहीं, पीड़ित ने हल्का कांस्टेबल अशोक यादव और कांस्टेबल अभिषेक पासवान पर भी आरोप लगाए हैं कि उन्होंने कथित रूप से मामले को थाने के बाहर ही रफा-दफा कराने का प्रयास किया।
‘दवा के लिए पांच हजार रुपये’—अब सवाल पुलिस पर
सूत्रों के अनुसार, एक कांस्टेबल द्वारा पीड़ित के इलाज के नाम पर पांच हजार रुपये दिए जाने की चर्चा भी क्षेत्र में तेजी से फैल रही है। यदि ऐसा हुआ, तो बड़ा सवाल यह उठता है कि पुलिस किसी पीड़ित को निजी तौर पर पैसा क्यों दे रही थी? क्या यह मानवीय सहायता थी या फिर समझौते की कोशिश? यदि सहायता थी तो उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड क्यों नहीं है? इन सवालों ने पूरे मामले को और अधिक संदेह के घेरे में ला दिया है।
पहले भी विवादों में घिर चुके हैं थानाध्यक्ष?
क्षेत्र में चर्चा है कि थाना प्रभारी पर पूर्व में भी कथित अभद्र व्यवहार, वायरल वीडियो और विवादित कार्यशैली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ताजा प्रकरण ने पुराने विवादों को भी फिर चर्चा में ला दिया है।
दूसरी बार सीओ जांच, अब निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद
बताया जा रहा है कि इस प्रकरण में दूसरी बार क्षेत्राधिकारी स्तर पर जांच कराई जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी या मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
एसपी पर बढ़ा नैतिक दबाव
पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी की भूमिका भी चर्चा में है। आमजन यह जानना चाहते हैं कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या संबंधित थाना प्रभारी और दोनों कांस्टेबलों पर कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होगी।
सबसे बड़ा सवाल?
जिस गरीब परिवार की आजीविका उसी छोटी सी दुकान से चलती थी, यदि वही दुकान हिंसा का केंद्र बन जाए और न्याय मांगने वाला ही व्यवस्था के सामने असहाय महसूस करे, तो कानून पर आम नागरिक का भरोसा कैसे कायम रहेगा?
अब देखना यह होगा कि सीओ की जांच पीड़ित को न्याय दिलाती है या यह मामला भी केवल जांच तक सीमित रह जाता है।