*कारख़ासों की ‘सत्ता’ पर कब चलेगा डंडा? ठूठीबारी और सिंदुरिया पुलिस की कार्यशैली पर उठे तीखे सवाल?*

Bureau Report /Narsingh Upadhyay Maharajganj /News 18 Plus /Sub Editor 

 

दो-दो जांच के बाद भी नतीजा गायब, अवैध कारोबार, सूचना लीक और कारख़ासों की भूमिका पर गहराया संदेह; अब नवागत एसपी से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद।

 

महराजगंज जनपद के ठूठीबारी और सिंदुरिया थाना क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चा कारख़ासों की बढ़ती सक्रियता को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में कारख़ासों का प्रभाव इतना अधिक दिखाई देता है कि थाना प्रभारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ जाती है। आखिर ऐसी क्या वजह है कि हर महत्वपूर्ण मामले में कारख़ासों की मौजूदगी और दखल की चर्चा होती है?

 

सीमा क्षेत्र होने के कारण ठूठीबारी लंबे समय से संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अवैध कारोबार की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन अपेक्षित स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखती। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई बार पुलिस की संभावित कार्रवाई की भनक पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच जाती है, जिससे कार्रवाई का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाता है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।

 

दूसरी ओर पुलिस लगातार सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से क्षेत्र में कड़ी निगरानी, अपराध नियंत्रण और शांति व्यवस्था बनाए रखने के दावे करती रही है। लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रही लगातार शिकायतें इन दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। सवाल यह है कि जब निगरानी इतनी प्रभावी है तो अवैध गतिविधियों और सूचना लीक की चर्चाएं बार-बार क्यों सामने आती हैं?

 

इस पूरे प्रकरण का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मामले की जांच दो बार क्षेत्राधिकारी स्तर पर कराई जा चुकी है, लेकिन आज तक उसका कोई स्पष्ट और सार्वजनिक परिणाम सामने नहीं आया। जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक न होने से लोगों के बीच संदेह और अविश्वास लगातार बढ़ रहा है। आखिर जांच हुई तो उसका परिणाम क्या निकला? यदि सब कुछ सही था तो स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई, और यदि अनियमितताएं मिलीं तो कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई?

 

जनता का कहना है कि पुलिस की साख केवल दावों से नहीं बल्कि पारदर्शी कार्रवाई से मजबूत होती है। यदि किसी पुलिसकर्मी या कारख़ास की भूमिका संदिग्ध नहीं है तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर सभी भ्रम दूर किए जाएं। वहीं यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनुचित हस्तक्षेप, सूचना लीक या संरक्षण की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।

 

अब पूरे जिले की निगाहें नवागत पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराएंगे और यदि किसी स्तर पर जवाबदेही तय होती है तो बिना किसी दबाव के कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। लगातार उठते सवालों और प्रकाशित खबरों के बावजूद पुलिस की चुप्पी भी अब चर्चा का विषय बन चुकी है।यह समाचार क्षेत्र में उठ रहे आरोपों, जनचर्चाओं और सार्वजनिक सवालों पर आधारित है।

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