Bureau Report Dheeraj/ Madheshiya /Nichlaul Correspondent/ News 18 Plus
महराजगंज। निचलौल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले मेन रोड भारत खंड–पकड़ी मार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कुछ माह पहले इस सड़क से संबंधित कार्य के लिए करीब 65 लाख रुपये की निकासी हुई, लेकिन इसके बावजूद सड़क की हालत आज भी बेहद खराब बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं, जिससे आए दिन राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
इस मामले को लेकर जिला पंचायत प्रत्याशी हरेंद्र यादव (एडवोकेट) ने कई बार जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराने और धनराशि के उपयोग का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
हादसों का बना कारण, ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क जिला मुख्यालय को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। सड़क की बदहाली के कारण कई लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण या मरम्मत कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया गया होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
सरकार की योजनाओं पर भी उठ रहे सवाल
प्रदेश सरकार लगातार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने का दावा करती रही है, लेकिन भारत खंड–पकड़ी मार्ग की स्थिति इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगाती दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि जब लाखों रुपये की धनराशि खर्च होने का दावा किया जा रहा है, तब सड़क की वास्तविक स्थिति इसकी पुष्टि नहीं करती।
जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित अभिलेखों की समीक्षा की जाए और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है।
नवागत जिलाधिकारी पर टिकी निगाहें
जनपद में नवागत जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल के कार्यभार संभालने के बाद अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि शिकायतों का संज्ञान लेकर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और सड़क की वास्तविक स्थिति के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या करोड़ों की विकास योजनाओं के बीच भरतखंड–पकड़ी मार्ग की बदहाली पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?