रिपोर्ट ब्यूरो सिंदुरिया
पिछले थानाध्यक्ष का हुआ ऑडियो वायरल:
मिठौरा ब्लॉक गेट के ठीक सामने ‘चौरसिया होटल’ में सरेआम उड़ रही कानून की धज्जियां, स्कूल जाने वाली मासूम बच्चियां बन रही शिकार
‘छापा मारने आ रहा हूँ, दुकान साफ कर लो..थाना प्रभारी के कथित लीक ऑडियो ने खोली खाकी की पोल, ‘सेटिंग-गेटिंग’ के खेल से साख तार-तार
महाराजगंज।कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए महाराजगंज के सिंदुरिया थाना अंतर्गत मिठौरा ब्लॉक गेट के ठीक सामने स्थित ‘चौरसिया होटल’ में अनैतिक देह व्यापार का घिनौना खेल खुलेआम फल-फूल रहा है। पूर्व थाना प्रभारी राजकुमार सिंह के कार्यकाल से शुरू हुआ यह काला धंधा आज भी बदस्तूर जारी है। रसूख और खाकी के कथित संरक्षण में चल रहे इस जिस्मफरोशी के रैकेट ने पूरे इलाके को शर्मसार कर दिया है।
दिखावे की दबिश, पहले ही लीक हो जाती है रेड की सूचना!
सूत्रों के मुताबिक, जब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, तो जनता के गुस्से को शांत करने के लिए सिंदुरिया पुलिस ने करीब एक महीने के भीतर छह बार छापेमारी का ढोंग रचा। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि हर छापेमारी से पहले ही होटल संचालक तक सूचना पहुंचा दी जाती थी।
हाल ही में जब ‘यूपी लाइव टीवी’ के उप-संपादक श्री त्रिपाठी और ‘न्यूज़ 18± प्लस’ की टीम मौके पर हकीकत खंगालने पहुंची, तो होटल संचालक का दुस्साहस देखने लायक था। उसने अपना लेजर (खाता) दिखाते हुए सिंदुरिया पुलिस के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया और तंज कसते हुए बोला— “यह देखिए, पुलिस के डर से लोग हमारे यहाँ खाना तक खाने नहीं आते।” यह बयान साफ जाहिर करता है कि अपराधी के हौसले बुलंद हैं और उसे खाकी का कोई खौफ नहीं है। मासूम स्कूली बच्चियां बन रहीं शिकार, तय होती है ‘रेट सूची’ इस पूरे मामले का सबसे स्याह और खौफनाक पहलू यह है कि सूत्रों के अनुसार, कम उम्र की मासूम लड़कियों को बहला-फुसलाकर स्कूलों और ग्राम सभाओं से इस दुकान के अंदर लाया जाता है। इसके बाद बंद कमरों में उनकी अस्मत का ‘रेट’ तय होता है। सिंदुरिया पुलिस की इस घोर लापरवाही या यूं कहें कि मौन सहमति ने क्षेत्र की बेटियों की सुरक्षा को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
“दुकान साफ कर लो, मैं छापा मारने आ रहा हूँ” वायरल वीडियो से खुली पोल
इस मामले में पुलिस कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा कलंक तब लगा जब दुकानदार का एक कथित ऑडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में तत्कालीन थाना अध्यक्ष कथित तौर पर होटल संचालक से यह कहते नजर आ रहे हैं कि— “या तो दुकान का लाइसेंस दिखाओ, या दुकान को साफ कर लो… मैं छापा मारने आ रहा हूँ।
यह ऑडियो/ क्लिप चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बचाने और साक्ष्यों को मिटाने के लिए छापेमारी का नाटक करती है।
नए कप्तान भी नहीं कस पाए नकेल, ‘ट्विटर’ के दावे धरातल पर फेल!
हैरानी की बात यह है कि थाने पर नए थाना प्रभारी की तैनाती के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। उनके आने के बाद भी इस अवैध धंधे पर कोई एक्शन नहीं दिखा।
इससे पहले भी, इस क्षेत्र में अवैध गांजा और अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चला था। उस वक्त भी महाराजगंज पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर किए गए सिंदुरिया पुलिस के सारे दावे जमीनी हकीकत में पूरी तरह फेल साबित हुए थे। इसके बाद जिले के तेज-तर्रार पुलिस अधीक्षक (एसपी) शक्ति मोहन अवस्थी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा सदर क्षेत्राधिकारी (सीओ सदर)को सौंपा था। लेकिन अफसोस! इस भारी-भरकम आदेश के बाद भी सिंदुरिया पुलिस के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
बड़ा सवाल: खबर दबेगी या कड़क कप्तान का हंटर चलेगा?
अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि क्या इस बार भी सिंदुरिया पुलिस अपने पुराने ढर्रे पर चलते हुए इस गंभीर खबर को दबाने के लिए कोई नया हथकंडा अपनाएगी? क्या मासूम लड़कियों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले इस सिंडिकेट को फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?
फिलहाल, पूरे जिले और मीडिया जगत की निगाहें पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के ऊपर टिकी हैं। देखना यह है कि क्या कप्तान का हंटर इस देह व्यापार के अड्डे और इसके मददगार खाकीधारियों पर चलता है, या फिर यह मामला भी लालफीताशाही की भेंट चढ़ जाएगा!