Bureau Report/ Narsingh Upadhyay /Nichlaul News 18 Plus/ Sub Editor
निचलौल में अवैध कारोबार पर सवाल, पत्रकार को धमकी का आरोप: क्या सच उजागर करना बन गया अपराध?
महराजगंज/निचलौल। जनपद महराजगंज के निचलौल थाना क्षेत्र से कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि थाना क्षेत्र में खुलेआम अवैध कारोबार संचालित हो रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय सच उजागर करने वाले पत्रकारों को ही धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। मामले ने स्थानीय स्तर पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है।
बताया जा रहा है कि निचलौल थाना क्षेत्र के अंतर्गत विकास खंड की कुल 62 ग्राम पंचायतें आती हैं, जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। लेकिन क्षेत्र में अवैध शराब, नेपाली शराब, गांजा और कथित अनैतिक कारोबार के संचालन के आरोप लगातार उठते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाना परिसर के आसपास और प्रमुख मार्गों पर कुछ होटल एवं दुकानों की आड़ में संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इनमें महराजगंज-ठूठीबारी रोड स्थित कुछ होटल, चौक रोड दमकी क्षेत्र, सिसवा रोड स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान के आसपास अवैध गतिविधियों के संचालन की चर्चाएं जोरों पर हैं। आरोप यह भी है कि रिहायशी इलाकों तक में अवैध शराब और गांजा की बिक्री धड़ल्ले से जारी है।
इसी मुद्दे को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद विवाद और बढ़ गया। पत्रकार का आरोप है कि खबर सामने आने के बाद उन पर दबाव बनाया गया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्विटर’ से पोस्ट हटवाने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, कथित तौर पर कुछ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में धमकी भरे अंदाज में कहा गया कि “आप मेरे बारे में जानते नहीं हैं, किसी से पता कर लीजिए।”
पत्रकार का आरोप है कि उन्हें उस समय थाने बुलाया गया जब निचलौल पुलिस गणना कार्य में लगी हुई थी। उनका कहना है कि यदि सच लिखने के कारण उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी निचलौल थाना पुलिस, थाना प्रभारी और कथित “काराखास” व्यवस्था से जुड़े लोगों की होगी।
मामले को लेकर पत्रकारों और आम नागरिकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता की सुरक्षा की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा सरकार द्वारा कानून व्यवस्था को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों के बीच यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है।
वहीं पुलिस विभाग में “काराखास” व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि थानों में अनौपचारिक रूप से प्रभावशाली लोगों की भूमिका बढ़ती जा रही है, जबकि नियमानुसार इस प्रकार की नियुक्ति और जिम्मेदारी का अधिकार उच्च अधिकारियों के स्तर पर ही होना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निचलौल थाना क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध कारोबारों पर निष्पक्ष जांच होगी? क्या पत्रकारों को सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलेगी? और क्या पुलिस अधीक्षक महराजगंज इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे?
फिलहाल पूरे प्रकरण को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।