रिपोर्ट नरसिंह उपाध्याय महराजगंज
क्षत्रिय महासभा, बनिया महासभा समेत विभिन्न संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, जमकर की नारेबाजी।
महराजगंज। यूजीसी कानून, अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम (एससी-एसटी एक्ट) और आरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर शुक्रवार को महराजगंज जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और संबंधित मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान क्षत्रिय महासभा, बनिया महासभा तथा संयुक्त मोर्चे के तत्वावधान में विभिन्न महासभाओं से जुड़े लोग भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि संबंधित मुद्दों को लेकर लंबे समय से लोगों के बीच असंतोष है। सरकार को उनकी मांगों और समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाना चाहिए।
500 से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा
बातचीत के दौरान ललित उपाध्याय ने दावा किया कि प्रदर्शन में करीब 500 से अधिक लोग उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठनों के लोग एकजुट होकर अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचे हैं।
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार से नीतियों पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि यदि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
‘नीतियां नहीं बदलीं तो सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे’
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों और मुद्दों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तथा सरकार की नीतियों में बदलाव नहीं हुआ तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि “अगर सरकार की नीति इसी तरह जारी रही तो सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे।”
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों और व्यक्त किए गए विचार प्रदर्शनकारियों के अपने दावे और राजनीतिक/सामाजिक रुख को दर्शाते हैं।
ज्ञापन सौंपकर रखीं विभिन्न मांगें
प्रदर्शन समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों की ओर से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी कानून, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां एवं मांगें प्रशासन के समक्ष रखी गईं।
अब प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, यह आने वाला समय बताएगा। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मुद्दों को कितनी गंभीरता से लेती है और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
मांगों पर कार्रवाई होगी या फैसलों पर कायम रहेगी सरकार?
जिला मुख्यालय पर हुए इस प्रदर्शन के बाद अब निगाहें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। वहीं, प्रशासन और सरकार की ओर से इस प्रदर्शन तथा ज्ञापन को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है, यह फिलहाल देखने वाली बात होगी।
प्रदर्शन ने एक बार फिर यूजीसी कानून, एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर चल रही बहस को जिला स्तर पर सामने ला दिया है।