लक्ष्मीपुर खुर्द चौकी से सटे नेपाल में 95 लाख के मोबाइल सामान की बड़ी बरामदगी, पिकअप छोड़कर तस्कर फरार।

न्यूज़ 18 प्लस ब्यूरो/ठूठीबारी

सीमा के इस पार पुलिस सोई रही, उस पार पकड़ी गई एक करोड़ की मोबाइल खेप!

महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा से सटे ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मीपुर खुर्द चौकी के ठीक सामने नेपाल में करीब 95 लाख रुपये कीमत के मोबाइल सामान की बड़ी खेप बरामद होने से सीमा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेपाल पुलिस और सशस्त्र प्रहरी बल की संयुक्त टीम ने सरावल गांवपालिका-7 के भूजहवा क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए तस्करी का सामान बरामद किया। कार्रवाई के दौरान पिकअप चालक वाहन लॉक कर मौके से फरार हो गया।

 

नेपाल पुलिस के अनुसार, बरामद सामान और वाहन की कुल कीमत करीब 1 करोड़ 14 लाख 84 हजार रुपये आंकी गई है। बरामद खेप में 22 लाख 94 हजार रुपये के 2,294 पीस मोबाइल एयरपॉड्स, 70 लाख 95 हजार रुपये के 44,300 टेम्पर्ड ग्लास, 93 हजार रुपये के 930 मोबाइल कवर तथा करीब दो हजार रुपये की प्लास्टिक शामिल है।

 

जिला पुलिस कार्यालय के सूचना अधिकारी डीएसपी मदन थापा के मुताबिक, सामान लु 3 च 2939 नंबर की पिकअप में लादकर ले जाया जा रहा था। आवश्यक कार्रवाई के लिए वाहन और बरामद सामान को महेशपुर भंसार कार्यालय भेज दिया गया है।

 

15 करोड़ की सोना तस्करी के बाद एक करोड़ की मोबाइल खेप ने बढ़ाई बेचैनी

 

ठूठीबारी सीमा क्षेत्र में लगातार सामने आ रही बड़ी बरामदगियों ने भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय कथित तस्करी नेटवर्क को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले 15 करोड़ रुपये की सोना तस्करी का मामला चर्चा में रहा और अब नेपाल क्षेत्र में करीब एक करोड़ रुपये के मोबाइल सामान की खेप पकड़े जाने से सीमा पर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि लक्ष्मीपुर खुर्द चौकी से सटे सीमा क्षेत्र से इतनी बड़ी खेप नेपाल तक पहुंच गई, लेकिन भारतीय क्षेत्र में तैनात पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या तस्कर सीमा पार करने के लिए ऐसे रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन पर निगरानी कमजोर है?

 

क्या सीमा पर निगरानी सिर्फ कागजों तक?

 

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि सीमा क्षेत्र में कथित तौर पर तस्करी का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और अलग-अलग रास्तों से सामान नेपाल भेजे जाने की बात सामने आती रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन कई पिकअप के जरिए सामान सीमा पार पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यह दावा सही है तो सीमा पर तैनात पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित चौकियों की निगरानी व्यवस्था आखिर किस स्तर पर काम कर रही है?

 

जांच का विषय: आखिर भारतीय सीमा से कौन निकाल रहा है तस्करी का माल?

 

नेपाल में लगातार बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद अब निगाहें भारतीय सीमा क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी टिक गई हैं। जरूरत इस बात की है कि संबंधित एजेंसियां यह पता लगाएं कि सामान कहां से आया, किस रास्ते से सीमा पार कराया गया, इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और भारतीय क्षेत्र में इसकी निगरानी क्यों नहीं हो सकी।

 

यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी या सुरक्षा तंत्र की मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि तस्करी के आरोप निराधार हैं तो संबंधित एजेंसियों को सीमा पार सामान पहुंचने की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए।

 

नेपाल में हुई इस बड़ी बरामदगी ने एक बार फिर ठूठीबारी सीमा की निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि जांच की आंच तस्करों तक पहुंचती है या फिर मामला बरामदगी तक ही सीमित रह जाता है।

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