*सीमा पर 274 बोतल ओल्ड मोंक रम बरामद, फिर उठे निगरानी पर सवाल?*

Bureau/ Report News 18 Plus /Thuthibari 

 

ठूठीबारी मुख्य गेट से नेपाल पहुंची भारतीय कार, महेशपुर सीमा क्षेत्र में नेपाल पुलिस ने पकड़ी; दो हिरासत में, शराब व कार की कीमत करीब 40.48 लाख रुपये।

 

महराजगंज। इंडो-नेपाल सीमा पर तस्करी के खिलाफ नेपाल पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर भारतीय सीमा क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठूठीबारी मुख्य गेट से नेपाल सीमा में प्रवेश करने वाली भारतीय कार को महेशपुर सीमा क्षेत्र में नेपाल पुलिस ने पकड़ लिया। कार से 274 बोतल ओल्ड मोंक रम बरामद होने की बात सामने आई है। मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। बरामद शराब और कार की कुल कीमत करीब 40.48 लाख रुपये आंकी गई है।

 

बताया जा रहा है कि कार ठूठीबारी मुख्य गेट से नेपाल में दाखिल हुई और कुछ ही दूरी पर नेपाल पुलिस की पकड़ में आ गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी शराब की खेप भारतीय सीमा क्षेत्र से निकलकर नेपाल की सीमा में आखिर पहुंची कैसे?

 

सवाल सिर्फ नेपाल पुलिस की कार्रवाई का नहीं, भारतीय सीमा की निगरानी का भी

 

सीमा पर लगातार निगरानी, चेकिंग और तस्करी रोकने के दावों के बीच इतनी बड़ी खेप का सीमा पार पहुंच जाना स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करता है। यदि मुख्य सीमा गेट से वाहन नेपाल में प्रवेश कर गया था, तो भारतीय सीमा पर उसकी जांच और निगरानी किस स्तर पर हुई? क्या वाहन की तलाशी ली गई थी? यदि नहीं, तो इसकी वजह क्या थी?

 

सबसे अहम सवाल यह भी है कि 274 बोतलों जैसी बड़ी खेप को सीमा पार कराने के लिए किन रास्तों और किन व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया गया?

 

ठूठीबारी में ‘निगरानी’ के दावों पर फिर सवाल

 

ठूठीबारी सीमा और कस्बे में पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। बलवंत यादव, जिन्हें स्थानीय स्तर पर पुलिस का कारखास बताए जाने की चर्चा है और जो कथित तौर पर सीमा तथा कस्बे की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, उनकी भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

हालांकि, कारख़ास बलवंत यादव की किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी सवालों घेरे में बलवन्त यादव? हमेशा चर्चा में रहते हैं बलवंत यादव 2 साल 112 नंबर डायल में सर्विस देने के बाद 2 साल अब थाने पर दे रहे हैं सेवा आखिर इतनी मेहरबानी क्यों?

 

थाना प्रभारी अमित सिंह से भी जवाबदेही पर सवाल

 

थाना प्रभारी अमित सिंह के कार्यकाल में सीमा क्षेत्र से जुड़ी इस बड़ी बरामदगी ने पुलिस की स्थानीय खुफिया और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। सवाल यह है कि जब सीमा क्षेत्र में पुलिस की सक्रिय निगरानी का दावा किया जाता है, तो इतनी बड़ी खेप भारतीय सीमा से नेपाल तक पहुंचने से पहले स्थानीय पुलिस की जानकारी में क्यों नहीं आई?

 

क्या पुलिस की निगरानी व्यवस्था केवल कागजों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित है, या वास्तव में सीमा के संवेदनशील मार्गों पर प्रभावी निगरानी हो रही है?

 

स्थानांतरण के बाद भी आठ महीने से तैनाती, आखिर क्यों?

 

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी चर्चा में है कि स्थानांतरण की चर्चाओं/आदेशों के बावजूद संबंधित पुलिसकर्मियों की तैनाती लंबे समय से बनी हुई है या नहीं और यदि ऐसा है तो उसका प्रशासनिक आधार क्या है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है, तो उसके लंबे समय तक उसी स्थान पर बने रहने के पीछे क्या कारण हैं—यह पुलिस विभाग से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

 

फिलहाल नेपाल पुलिस की कार्रवाई ने भारतीय सीमा की निगरानी व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है?

 

जब 274 बोतलों की खेप सीमा पार नेपाल पहुंच गई, तो भारतीय सीमा पर तैनात निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

 

अब देखना होगा कि महराजगंज पुलिस इस बरामदगी को लेकर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या भारतीय सीमा से नेपाल तक खेप पहुंचने की पूरी कड़ी की निष्पक्ष जांच कराई जाती है।

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