न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/निचलोल
महराजगंज। निचलौल विद्युत उपकेंद्र से जुड़े एक उपभोक्ता के बिजली बिल में भारी अंतर ने बिलिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता प्रहलाद के खाते में पहले ₹88,342 की अंकित राशि अंकित थी, जबकि बाद में उसी खाते में देय राशि के अंकित मूल्य पर ₹1,754 अंकित हो गए। कुछ ही समय के अंतर में हजारों रुपये की अनारी में आए इतने बड़े बदलाव से उपभोक्ता भी हैरान हैं।

जानकारी के अनुसार, इलेक्ट्रानिक विद्युत वितरण निगम से जुड़े उपभोक्ता के 8177636000 में पहले ₹88,342 का बिल दिखाया गया था। इसकी नियुक्ति तिथि 13 सितंबर 2025 निर्धारित की गई थी। भारी-भरकम बिल देखकर उपभोक्ताओं के सामने भुगतान को लेकर परेशानी खड़ी हो गई।
हालाँकि, बाद में उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के ऑनलाइन पोर्टल पर डेट की स्थिति देखने पर देय राशि में बड़ा बदलाव दिखाई दिया। स्थिति में कुल बिल ₹1,754 दर्शाया गया, नियुक्ति दिनांक 11 नवंबर 2025 दिखाई दे रही है।
प्रश्न: अंतिम ₹86,588 का अंतर कैसे आया?
पहले दर्ज ₹88,342 और बाद में दर्शाया गया ₹1,754 के बीच ₹86,588 का अंतर है। इतनी बड़ी राशि के अंतर ने बिलिंग प्रक्रिया और पोर्टल पर डेटा अपडेट होने की व्यवस्था को लेकर प्रश्न चिह्न नीचे दिए हैं। हालाँकि, केवल बिल की राशि में अंतर आपके लिए किसी भी वर्ष का प्रमाण नहीं है; इसके पीछे के मीटर, बिल संशोधन, इंटरमीडिएट सेमेस्टर या तकनीकी कारण हो सकते हैं।
अधिकारी बोले-संशोधन किया जा रहा है
कभी-कभी बिलों में जमा दस्तावेजों में त्रुटि, गलत बिलिंग या तकनीकी तकनीकी समस्या के कारण कभी-कभी बिलों में दस्तावेज सामने आ सकते हैं। डिविज़न प्रक्रिया के तहत जांच के बाद ऐसे बिलों में संशोधन किया जाता है।
केस इंक टेक्निकल त्रुटि का हो या बिल संशोधन की प्रक्रिया का, लेकिन ₹88 हजार से अधिक की अचल संपत्ति का अचानक ₹1,754 होना यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि ग्राहकों को सही बिल की जानकारी समय पर और स्पष्ट रूप से क्यों नहीं मिलती। बिजली विभाग के बिलिंग सिस्टम में प्लॉट और डेटा अपडेट की डिटेल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी जरूरी है।