भैंसा मारे जाने के मामले में कार्रवाई न होने पर भड़के ग्रामीण, परसा मलिक पुलिस के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना!

पुलिस की भूमिका की जांच और मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़े ग्रामीण, डीएम-एसपी से हस्तक्षेप की गुहार।

 

न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/परसामलिक 

 

परसा मलिक, महराजगंज। थाना परसा मलिक क्षेत्र के ग्राम सभा जिगिना में एक भैंसा मारे जाने के मामले को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। पुलिस की कथित कार्यशैली और मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से नाराज दर्जनों ग्रामीण रविवार को अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में भैंसा मारे जाने की घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत कर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस की ओर से मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई और आखिरकार उन्होंने सामूहिक रूप से धरना शुरू कर दिया।

 

बैनर पर लिखी मांगों ने खींचा ध्यान

 

धरना स्थल पर लगाए गए बैनर में ग्रामीणों ने परसा मलिक पुलिस की भूमिका की जांच कराने तथा भैंसा मारे जाने के मामले में आरोपित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग प्रमुखता से उठाई है। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने हाथ उठाकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

 

ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर है। उन्होंने पुलिस की भूमिका की भी जांच कराए जाने की मांग उठाई है, ताकि घटना की वास्तविकता सामने आ सके।

 

कार्रवाई होने तक धरना जारी रखने की चेतावनी

 

ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि जब तक घटना में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई नहीं की जाती और पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

 

मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक महराजगंज से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उच्चाधिकारियों के स्तर से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई होने पर ही उन्हें न्याय की उम्मीद है।

 

फिलहाल गांव में ग्रामीणों के धरने से पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की मांगों पर कब तक कार्रवाई होती है।

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