ब्यूरो निचलौल/महराजगंज:
हाइलाइट:
– लाखों के बिलों को ‘जीरो’ करने का खेल, उपभोक्ताओं से अवैध धन उगाही का आरोप
– भ्रष्टाचार की कमाई से बनाई अकूत संपत्ति, उपभोक्ताओं ने आईडी और संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच की मांग
महराजगंज जिले में विद्युत उपभोक्ताओं का शोषण थमने का नाम नहीं ले रहा है। भ्रष्टाचार और मनमानी का एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला निचलौल विद्युत उपकेंद्र से सामने आया है, जहां तैनात दो बड़े बाबू नियमों को ताक पर रखकर पिछले 6 वर्षों से एक ही पटल पर जमे हुए हैं। इन कर्मचारियों पर उपभोक्ताओं के भारी-भरकम बिजली बिलों को गोलमोल कर उसे ‘जीरो’ करने और बाद में नए बिलों के जरिए उपभोक्ताओं को मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगा है। जबकि विभागीय स्तर से इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला और कैसे चलता है खेल?:
स्थानीय विद्युत उपभोक्ताओं का आरोप है कि निचलौल उपकेंद्र पर तैनात दोनों बड़े बाबूओं द्वारा पिछले लंबे समय से बिल संशोधन और भुगतान के नाम पर अवैध धन उगाही का खेल खेला जा रहा है। खेल का तरीका बेहद शातिर है—उपभोक्ताओं के बकाए या अधिक राशि वाले बिलों को साफ्टवेयर या रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अचानक ‘जीरो’ कर दिया जाता है, जिससे उपभोक्ता को कुछ समय के लिए राहत मिलती है, लेकिन जैसे ही अगला बिल जनरेट होता है, पुराना सारा बकाया पुनः जुड़कर आने लगता है। इसके बाद पीड़ित उपभोक्ता जब सुधार के लिए चक्कर काटता है, तो उससे मनमाने तरीके से अवैध वसूली की जाती है।
भ्रष्टाचार की कमाई से बनाई अचल संपत्ति:
उपभोक्ताओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पिछले 60 महीनों (6 वर्षों) से एक ही मलाईदार पटल पर जमे इन कर्मचारियों ने अपनी इस अवैध कमाई के दम पर कई जगहों पर कीमती जमीनें और आलीशान मकान खड़े कर लिए हैं। जनता का कहना है कि यदि इनके कार्यकाल के दौरान इनकी यूजर आईडी से किए गए सभी बिल संशोधनों, भुगतानों और वित्तीय लेन-देन की तकनीकी जांच कराई जाए, तो इस बड़े घोटाले की परतें खुद-ब-खुद उघड़ कर सामने आ जाएंगी।
जांच की उठी मांग:
पीड़ित उपभोक्ताओं और क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों ने उच्चाधिकारियों (अधीक्षण अभियंता और प्रबंध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड) से मांग की है कि:
1)निचलौल उपकेंद्र पर पिछले 6 वर्षों से एक ही पटल पर जमे दोनों बड़े बाबूओं को तत्काल प्रभाव से अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
2)इनकी यूजर आईडी से पिछले वर्षों में किए गए सभी बिल संशोधनों और वित्तीय लेन-देन की विशेष ऑडिट टीम से गहन जांच कराई जाए।
3)भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित की गई इनकी बेनामी और अचल संपत्तियों की उच्चस्तरीय विजिलेंस (सतर्कता विभाग) जांच बैठाकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।