नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली और फिर जान से मारने की धमकी! महराजगंज में कथित फर्जी भर्ती गिरोह पर गंभीर आरोप!

न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/निचलौल

 

फर्जी नियुक्ति पत्र थमाकर बेरोजगारों को बनाया निशाना, 2.20 लाख रुपये ऐंठने का आरोप; करीब 170 लोगों से वसूली की आशंका ने खड़े किए बड़े सवाल, एसपी ने सीओ निचलौल को सौंपी जांच।

महराजगंज। बेरोजगारी की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूलने, फर्जी नियुक्ति पत्र देकर भरोसा जीतने और पैसे वापस मांगने पर परिवार को जान से मारने की धमकी देने के आरोपों ने पुलिस महकमे में भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोठीभार थाना क्षेत्र की एक महिला ने कथित नौकरी ठगी के इस मामले में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी से गुहार लगाई है। पीड़िता ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, ठगी गई रकम वापस दिलाने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है।

शिकायतकर्ता सुमन शर्मा पत्नी अजय शर्मा, निवासी पाकौली कला के अनुसार, जनवरी 2026 में उनकी मुलाकात अभिमन्यु चौधरी उर्फ रामा चौधरी से हुई थी। आरोप है कि उसने 40 हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी दिलाने का सपना दिखाया। इसी भरोसे में पीड़िता के 1.20 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण गिरवी रखवाए गए। इतना ही नहीं, नौकरी लगवाने के नाम पर दो अन्य लोगों से भी 50 हजार और 60 हजार रुपये लिए जाने का आरोप है। इस प्रकार कुल 2.20 लाख रुपये की कथित वसूली का दावा किया गया है।

 

कागज पर नौकरी, हकीकत में विभाग का नाम तक नहीं!

पीड़िता का आरोप है कि रकम लेने के बाद उसे नियुक्ति पत्र थमा दिया गया, लेकिन नौकरी किस विभाग में है, कहां कार्यभार ग्रहण करना है और नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। जब संदेह होने पर अपने स्तर से पड़ताल की गई तो कथित मुख्य आरोपी के खिलाफ अलग-अलग थानों में धोखाधड़ी, जालसाजी, अपहरण और मारपीट जैसे मामलों में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी मिलने का दावा किया गया।

 

शिकायत में पंकज श्रीवास्तव, अभिमन्यु चौधरी और प्रिंस विश्वकर्मा सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 170 लोगों से रकम वसूले जाने की आशंका है। यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल एक परिवार की ठगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बेरोजगारों को निशाना बनाने वाले बड़े नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।

 

रकम मांगते ही बदल गया व्यवहार, अब जान से मारने की धमकी का आरोप

 

पीड़िता के मुताबिक, जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की तो कथित आरोपियों की ओर से फोन पर धमकियां मिलने लगीं। आरोप है कि महिला, उसके पति और भाई को जान से मारने तथा झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई।

 

पीड़िता ने बातचीत की कथित कॉल रिकॉर्डिंग भी अधिकारियों को उपलब्ध कराने की बात कही है। उनका दावा है कि इन रिकॉर्डिंग में नौकरी का भरोसा देने, रुपये के लेन-देन, नियुक्ति पत्र और रकम वापसी से जुड़ी बातचीत मौजूद है। रिकॉर्डिंग के सामाजिक माध्यमों के समूहों में प्रसारित होने की भी चर्चा है। हालांकि, रिकॉर्डिंग की वास्तविकता और उसमें मौजूद आवाजों की प्रामाणिकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

45 हजार लौटाए, बाकी रकम पर अब भी सवाल

 

पीड़िता का कहना है कि जिन दो अन्य लोगों से नौकरी के नाम पर रकम ली गई थी, उनमें से 45 हजार रुपये वापस किए गए हैं, लेकिन शेष भुगतान अब तक नहीं हुआ। 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे पीड़िता को कोठीभार थाने बुलाए जाने की बात भी सामने आई है।

 

इस प्रकरण में कोठीभार थाना प्रभारी अखिलेश कुमार वर्मा ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वहीं, मिली जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने शिकायत की जांच क्षेत्राधिकारी निचलौल रविंद्र कुमार सिंह को सौंपी है।

 

सीओ का आश्वासन—दोषियों को नहीं मिलेगी राहत

 

क्षेत्राधिकारी निचलौल रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई होगी तथा दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

 

अब जांच के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

 

क्या कथित फर्जी नियुक्ति पत्रों की सच्चाई सामने आएगी? क्या करीब 170 लोगों से रकम वसूले जाने के दावे की पड़ताल कर सभी कथित पीड़ितों तक पुलिस पहुंचेगी? और क्या धमकी देने के आरोपों की जांच कर पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिल पाएगी?

 

बेरोजगारों को नौकरी का सपना दिखाकर कथित ठगी का यह मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है। जरूरत है कि केवल शिकायतकर्ता ही नहीं, बल्कि कथित रूप से प्रभावित सभी लोगों के बयान और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच हो, ताकि नौकरी के नाम पर चल रहे किसी भी संभावित फर्जीवाड़े का सच सामने आ सके।

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