सीसी रोड निर्माण में अभिलेखों और मौके की स्थिति में अंतर, सफाई सामग्री पर 3.38 लाख रुपये खर्च का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका; जांच रिपोर्ट जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजी गई।

बैठवलिया ग्राम पंचायत में विकास कार्यों की जांच पूरी, मनरेगा कार्यों में मिलीं अनियमितताएं

 

न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/निचलौल

 

महराजगंज। विकास खंड निचलौल की ग्राम पंचायत बैठवलिया में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों की जांच आख्या सामने आने के बाद ग्राम पंचायत में हुए कार्यों की गुणवत्ता और खर्च को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता प्रभाकर जायसवाल की शिकायत पर 13 अगस्त 2026 को सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) ने मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण एवं जांच की थी। इस दौरान तत्कालीन ग्राम प्रधान/प्रशासक, ग्राम पंचायत सचिव अब्दुल्ला सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

 

सीसी रोड निर्माण में मिली खामियां

 

जांच रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में मेन मार्केट से गौसदन तक क्षतिग्रस्त सीसी रोड के निर्माण कार्य में अनियमितता और अभिलेखों में फेरबदल की बात सामने आई है। तकनीकी सहायक ने सड़क की लंबाई 174.50 मीटर मापी थी, जबकि भुगतान मनरेगा के इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर आदेश (एफटीओ) के माध्यम से किया गया। निरीक्षण में सड़क पर जगह-जगह गिट्टी उखड़ी मिली। इसे देखते हुए जनहित में तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

 

पोखरे की खुदाई का नहीं हो सका स्थलीय आकलन

 

छुटट घाट के पास धोबहा पुल के बगल में वित्तीय वर्ष 2022-23 में कराए गए पोखरा खुदाई कार्य की भी जांच की गई। हालांकि बरसात के मौसम के कारण पोखरे में पानी भरा होने से कार्य का वास्तविक आकलन मौके पर नहीं हो सका। वहीं, अभिलेखों की जांच में संबंधित पत्रावली सही पाई गई।

 

सफाई सामग्री के नाम पर 3.38 लाख रुपये खर्च

 

वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्राम पंचायत में सफाई सामग्री की खरीद के लिए 3,43,990 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया था। इसमें से विभिन्न तिथियों में 3,38,600 रुपये खर्च किए गए। जांच अधिकारियों के मुताबिक, जांच के समय खरीदी गई सामग्री का भौतिक सत्यापन संभव नहीं हो सका।

 

जिला पंचायत राज अधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट

 

जांच अधिकारियों ने अपनी आख्या आगे की कार्रवाई के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी, महराजगंज को प्रेषित कर दी है। अब इस मामले में जिला स्तरीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर ग्रामीणों और शिकायतकर्ता की निगाहें टिकी हैं। जांच रिपोर्ट में सामने आई खामियों के बाद संबंधित कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान और खर्च की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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