*एक पार्क, दो फंड और भारी हेरफेर: भेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाले की जांच करने पहुंची टीम।*

ब्यूरो रिपोर्ट नरसिंह उपाध्याय/ निचलौल महराजगंज 

महराजगंज/निचलौल: निचलौल ब्लॉक के भेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा पार्क के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम ने गांव पहुंचकर पार्क का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान ₹5.09 लाख की धनराशि नियमों को ताक पर रखकर निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे विभाग में खलबली मची हुई है।

 

दिखावे की सफाई और तकनीकी जांच:

जांच टीम के पहुंचने की भनक लगते ही ग्राम प्रधान सुबह से ही पार्क में मजदूरों को लगाकर साफ-सफाई कराते दिखे। दोपहर करीब 12 बजे डीसी मनरेगा गौरवेंद्र सिंह और सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मन्नू चौधरी की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता जांची। टीम ने मनरेगा से जुड़े करीब ₹32 लाख के भुगतान की फाइलों और ग्राम निधि के अभिलेखों को तलब किया।

 

डबल पेमेंट का पेच:

 

जांच का मुख्य केंद्र ‘एक काम-दो भुगतान’ का मामला है। अभिलेखों के अनुसार, पार्क के समतलीकरण के लिए मनरेगा मद से ₹5.28 लाख खर्च किए गए। इसके बावजूद ग्राम निधि से उसी काम के लिए ₹1.34 लाख मिट्टी भराई और ₹85 हजार मजदूरी के नाम पर फिर से निकाल लिए गए। अधिकारी अब उन मजदूरों की सूची का मिलान कर रहे हैं, जिन्हें दोनों फंड से भुगतान दिखाया गया है।

 

नियमों की उड़ी धज्जियां:

 

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि ₹5,09,580 की मोटी रकम गांव के ही तीन व्यक्तियों के व्यक्तिगत बैंक खातों में छह किस्तों में भेजी गई। डीसी मनरेगा ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी कार्य का भुगतान वेंडर या फर्म के बजाय निजी खाते में करना गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है।

 

भौतिक सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है। सिंचाई विभाग के इंजीनियर अब तकनीकी और अभिलेखीय जांच करेंगे। रिपोर्ट मिलते ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।”

 

— गौरवेंद्र सिंह, डीसी मनरेगा

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