रिपोर्ट/ विप्लव मद्धेशिया ठूठीबारी, महाराजगंज
नेपाल के पश्चिम नवलपरासी के महेशपुर कस्टम ऑफिस पर गंभीर आरोप लगे हैं कि यहां ज़ब्त किए गए लहसुन और अन्य सामानों की नीलामी नियमों के विपरीत, मिलीभगत के जरिए की जा रही है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह पूरा खेल कस्टम ऑफिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ से लंबे समय से चल रहा है।

सूत्रों के अनुसार, करीब एक महीने पहले सुरक्षाकर्मियों द्वारा रात में ज़ब्त किया गया लहसुन कस्टम अधिकारियों की मिलीभगत से उसी रात नीलाम कर दिया गया था। आरोप है कि यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि एक “रेगुलर सिस्टम” बन चुका है, जिसमें तय रकम मिलने पर ही नीलामी की जाती है। अगर उम्मीद के मुताबिक पैसे नहीं मिलते तो ज़ब्त सामान को ठिकाने लगा दिया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में नेपाल सरकार के राजस्व को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है। नीलामी से मिलने वाली वास्तविक राशि सरकारी खाते में जाने के बजाय निजी जेबों में पहुंच रही है, जिससे यह मामला सीधे-सीधे राजस्व घोटाले की ओर इशारा करता है।
आरोपों में यह भी सामने आया है कि सिक्योरिटी एजेंसियों द्वारा जब्त किया गया सामान कस्टम ऑफिस को सौंपने के बाद महीनों तक वेयरहाउस में रखा जाता है। इसके बाद दो से तीन महीने बाद मनमाने ढंग से नीलामी की जाती है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह मैनेज किया जाता है कि कस्टम ऑफिस से जुड़े कुछ बिचौलियों को सीधा फायदा मिले।
एक और गंभीर आरोप यह है कि कस्टम ऑफिस के अंदरूनी कर्मचारी और लीडरशिप लेवल के अधिकारी अपने बिचौलियों के साथ मिलकर ‘डोनर-लाइक स्टाइल’ में नीलामी की प्रक्रिया को अंजाम देते हैं, जहां नियमों की बजाय आपसी समझौते और लेन-देन के आधार पर फैसले होते हैं।
इस पूरे मामले पर अब तक संबंधित उच्च संस्थाओं की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और स्टेकहोल्डर्स का कहना है कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिस्टम और मजबूत हो जाएगा और सरकारी खजाने को होने वाला नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि महेशपुर कस्टम ऑफिस में ज़ब्त सामान की नीलामी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों पर रोक लग सके।