रिपोर्ट राकेश त्रिपाठी महराजगंज
“वन्य सुरक्षा में चूक या सिस्टम की लापरवाही? ग्रामीणों की जान पर भारी बनती तेंदुए की दहशत”
महराजगंज जनपद के निचलौल वन्य क्षेत्र से सटे गांव बढ़या मुस्तकील में शुक्रवार को तेंदुए के हमले ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस हमले में आबिद अली की 16 वर्षीय पुत्री शैरुन निशा की दर्दनाक मौत हो गई। किशोरी की मौत से गांव में कोहराम मच गया है और परिजन गहरे सदमे में हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शैरुन निशा दोपहर करीब 3:30 बजे अपने निजी कार्य से नहर किनारे स्थित बंधे की ओर गई थी। तभी पहले से घात लगाए बैठे तेंदुए ने अचानक उस पर हमला कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके की ओर दौड़े, लेकिन तब तक तेंदुआ किशोरी को गंभीर रूप से घायल कर चुका था।
ग्रामीणों की मदद से घायल किशोरी को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
घटना के बाद ग्रामीणों में तेंदुए की बढ़ती आवाजाही को लेकर गहरी चिंता और भय व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि वन्य क्षेत्र से सटे गांवों में तेंदुए लगातार देखे जा रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। लोगों ने वन विभाग से तेंदुए को जल्द पकड़ने, गश्त बढ़ाने और क्षेत्र में सुरक्षा उपाय सख्त करने की मांग की है।
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर वन्य क्षेत्रों से सटे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है।