ब्यूरो रिपोर्ट/दिलीप कुमार पाण्डेय महराजगंज
महराजगंज। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में इन दिनों कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जिले में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण व तैनाती को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। विभागीय सूत्रों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा है कि कुछ कर्मचारियों को विशेष संरक्षण मिलने के कारण नियम-कायदों की अनदेखी हो रही है।
जानकारी के अनुसार सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कपिल की कार्यशैली और उनके करीबी माने जाने वाले कुछ कर्मचारियों की तैनाती को लेकर विभाग के अंदर ही असंतोष की बातें सामने आ रही हैं। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद कुछ कर्मचारियों की जिले में मौजूदगी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तबादले के बाद भी जिले में मौजूदगी पर सवाल
विभागीय चर्चाओं में सबसे अधिक नाम रविंद्र यादव और कौशल श्रीवास्तव का लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी इनकी तैनाती को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे विभाग के कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या स्थानांतरण नीति का पालन समान रूप से हो रहा है या नहीं।
सूत्रों का कहना है कि लंबे समय से जिले में कार्यरत रहने के कारण कुछ कर्मचारियों का विभागीय कार्यों पर प्रभाव बढ़ गया है। ऐसे में अन्य कर्मचारियों के बीच यह भावना भी देखने को मिल रही है कि नियमों का पालन सभी के लिए एक जैसा होना चाहिए।
विभागीय कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
कुछ कर्मचारियों का यह भी कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेश के बाद भी कोई कर्मचारी पुराने स्थान पर कार्य करता हुआ पाया जाता है तो इससे विभागीय व्यवस्था और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। हालांकि इस मामले में विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
मंत्री की सख्त छवि के बीच उठी चर्चा
सिंचाई विभाग स्वतंत्र देव सिंह के अधीन आता है, जिन्हें प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता के लिए जाना जाता है। ऐसे में महराजगंज में सामने आ रही इन चर्चाओं ने विभागीय व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच और कार्रवाई की उम्मीद
विभाग से जुड़े कर्मचारी और आम लोग उम्मीद जता रहे हैं कि यदि स्थानांतरण और तैनाती को लेकर कोई अनियमितता है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ताकि विभाग में पारदर्शिता बनी रहे और नियमों का पालन सभी पर समान रूप से लागू हो सके।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और शासन स्तर से कोई कार्रवाई होती है या नहीं।