*ऑपरेशन के बाद महिला की मौत पर उठे सवाल: नोवा हॉस्पिटल के डॉक्टर का बड़ा बयान, “साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा!*

ब्यूरो रिपोर्ट/ राकेश त्रिपाठी महाराजगंज 

मुख्य सम्पादक 

महराजगंज। जिले में एक निजी अस्पताल में महिला की मौत के बाद उठे विवाद के बीच अब अस्पताल प्रबंधन की ओर से सफाई सामने आई है। नोवा हॉस्पिटल के संचालक डॉ. आलोक पटेल ने वार्ता कर पूरे मामले को स्पष्ट करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

वार्ता के दौरान डॉ. आलोक पटेल ने बताया कि संबंधित महिला मरीज को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से किसी व्यक्ति द्वारा यह कहकर उनके अस्पताल भेजा गया कि “नोवा हॉस्पिटल में बेहतर इलाज हो जाएगा।” इसके बाद महिला को नोवा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

 

डॉ. पटेल के अनुसार, भर्ती के पहले दिन मरीज का इलाज पूरी तरह व्यवस्थित और संतोषजनक तरीके से चल रहा था। चिकित्सकीय टीम लगातार निगरानी में थी और मरीज की स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन दूसरे दिन अचानक मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी।

 

उन्होंने बताया कि मरीज को अचानक पैनिक अटैक आया, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से गंभीर हो गई। तमाम प्रयासों के बावजूद महिला को बचाया नहीं जा सका और उसकी मृत्यु हो गई।

डॉ. आलोक पटेल का प्रभावशाली बयान!

“हमारे अस्पताल में मरीज का इलाज पूरी गंभीरता और मानकों के अनुसार किया गया। पहले दिन मरीज की स्थिति स्थिर थी, लेकिन दूसरे दिन अचानक आए पैनिक अटैक ने स्थिति को जटिल बना दिया। हमने हर संभव प्रयास किया, लेकिन दुर्भाग्यवश मरीज को नहीं बचाया जा सका।”

 

उन्होंने आगे कहा— “यह पहली बार नहीं है जब हमारे अस्पताल को निशाना बनाया गया है। कुछ लोग सुनियोजित तरीके से हमारी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक साजिश है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

परिजनों ने भी नहीं लगाया आरोप!

मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब मृतक महिला के परिजनों ने भी अस्पताल पर किसी तरह की लापरवाही का आरोप लगाने से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि इलाज उनके सामने ही चल रहा था और अस्पताल की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।

 

परिजनों ने स्पष्ट रूप से कहा— “हमारी मौजूदगी में पूरा इलाज हुआ। हमें अस्पताल से कोई शिकायत नहीं है। जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे निराधार हैं।”

साजिश या संयोग? जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

परिजनों के बयान के बाद यह मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। जहां एक ओर अस्पताल प्रबंधन इसे साजिश बता रहा है, वहीं दूसरी ओर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

 

फिलहाल, इस घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और उन पर लगने वाले आरोपों को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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