*मौत का चौराहा बना चिउरहां: हादसों की श्रृंखला से दहशत, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।*

ब्यूरो रिपोर्ट/ राकेश त्रिपाठी सिंदुरिया 

महराजगंज जनपद के सिसवा बाज़ार थाना क्षेत्र अंतर्गत चिउरहां चौराहा इन दिनों लगातार हो रहे सड़क हादसों के कारण लोगों के लिए खौफ का पर्याय बनता जा रहा है। यह चौराहा सिन्दुरिया–सिसवा मार्ग को जोड़ता है, जहां रोज़ाना भारी यातायात का दबाव रहता है। लेकिन सुरक्षा इंतज़ामों की घोर कमी के चलते यह स्थान अब “मौत का चौराहा” बन चुका है।

 

स्थानीय समाजसेवी विनोद तिवारी ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता को प्रेषित शिकायत में बताया है कि बीते कुछ दिनों में इस चौराहे पर कई गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।

 

हादसों की भयावह तस्वीर:

11 मार्च 2026: रात में दो बोलेरो गाड़ियों की आमने-सामने टक्कर में 10 वर्षीय बालक की दर्दनाक मौत, कई लोग घायल।

9 मार्च 2026: दोपहर में ऑटो और बाइक की भिड़ंत में एक महिला गंभीर रूप से घायल।

14 मार्च 2026: शाम करीब 4 बजे दो बाइकों की टक्कर में एक युवक दुकान में जा घुसा, जिससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया।

 

उसी रात एक तेज रफ्तार कार ने स्कूटी सवार को टक्कर मारकर फरार हो गई।

समस्या की जड़ क्या है?

शिकायत में बताया गया है कि चौराहे पर अब तक एक भी स्पीड ब्रेकर नहीं लगाया गया है, जिससे वाहन चालक तेज रफ्तार में गुजरते हैं। सड़क के दोनों किनारों पर अतिक्रमण के कारण दृश्यता बाधित होती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है।

 

इतना ही नहीं, चौराहे पर लगा CCTV कैमरा भी लंबे समय से खराब पड़ा है, जिससे हादसों के असली कारणों और दोषियों की पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है।

प्रशासन की अनदेखी पर सवाल:स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

मांगे क्या हैं?

समाजसेवी विनोद तिवारी ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि—

1. चिउरहां चौराहे पर आवश्यक स्थानों पर स्पीड ब्रेकर व रंबल स्ट्रिप्स लगाए जाएं।

2. चौराहे के आसपास फैले अतिक्रमण को हटाकर यातायात सुगम बनाया जाए।

3. खराब पड़े CCTV कैमरे को शीघ्र ठीक कराया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

निष्कर्ष:चिउटहां चौराहा आज प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। सवाल यह है कि आखिर कब जागेगा जिम्मेदार तंत्र, और कब इस “मौत के चौराहे” पर सुरक्षा की उम्मीद जगेगी?

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