Bureau Report /Rakesh Tripathi /Siswa Maharajganj News 18 Plus/ Chief Editor
महराजगंज: मजदूर दिवस के अवसर पर अविनाश श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण कविता ने श्रमिकों के संघर्ष, समर्पण और उनके अदृश्य योगदान को सशक्त शब्दों में उजागर किया। कविता में मजदूरों के पसीने से बने घरों और उनके अथक परिश्रम से सजे संसार की मार्मिक झलक देखने को मिली।
कविता की पंक्तियों में यह स्पष्ट किया गया कि मजदूर ही वह आधार हैं, जिनके श्रम से हर सपना साकार होता है। भीषण धूप में जलते तन और थकान भरे कदमों के बावजूद उनका हौसला कभी नहीं टूटता। रोटी की जद्दोजहद में बीतती जिंदगी के बीच भी उनका आत्मविश्वास समाज को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
रचनाकार ने मजदूरों के सम्मान में नमन करते हुए उन्हें केवल एक वर्ग नहीं, बल्कि पूरे समाज की नींव बताया है। यह कविता न केवल श्रमिकों के प्रति सम्मान प्रकट करती है, बल्कि हर व्यक्ति को उनके योगदान को समझने और सराहने का संदेश भी देती है।
✍️ — अविनाश श्रीवास्तव, महराजगंज (उ.प्र.)