न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/निचलौल

 

निचलौल (महराजगंज)। ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने और गांवों में विकास कार्य कराने के उद्देश्य से संचालित मनरेगा योजना में पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। निचलौल ब्लॉक क्षेत्र की मैरी ग्राम सभा में मनरेगा के तहत स्वीकृत दो कार्यों की मौके पर हुई पड़ताल में सरकारी अभिलेखों में दर्ज मजदूरों की संख्या और मौके पर दिखाई देने वाले श्रमिकों की संख्या में अंतर सामने आने का दावा किया गया है। इससे योजना के कार्यों की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

पहला मामला अभिलेखों में 44 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं

 

मैरी ग्राम सभा में प्राथमिक विद्यालय से अनिरुद्ध यादव के खेत तक सड़क की पटरी पर मिट्टी कार्य स्वीकृत है। उपलब्ध सरकारी विवरण के मुताबिक कार्य की अनुमानित लागत करीब 1.96 लाख रुपये बताई गई है और प्रतिदिन 44 मजदूरों के कार्य करने का विवरण दर्ज है।

 

मीडिया टीम की मौके पर पड़ताल के दौरान इस कार्यस्थल पर एक भी मजदूर दिखाई नहीं देने की बात सामने आई। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि संबंधित दिन मौके पर श्रमिक मौजूद नहीं थे तो अभिलेखों में दर्ज मजदूरों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई और मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

 

दूसरा मामला कागज पर 44, मौके पर 23 श्रमिक

 

दूसरे कार्य के रूप में लियाकत के घर से रामस्वरूप के खेत तक सड़क की पटरी पर मिट्टी भराई का कार्य दर्ज है। इसकी अनुमानित लागत भी करीब 1.95 लाख रुपये बताई गई है।

 

इस परियोजना में अभिलेखों के अनुसार प्रतिदिन 44 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होने की बात सामने आई, जबकि मौके की पड़ताल में 23 श्रमिक कार्य करते मिले। यदि अभिलेखों में दर्ज संख्या और वास्तविक उपस्थिति में अंतर की पुष्टि होती है तो यह मनरेगा के भुगतान और मस्टर रोल की जांच का गंभीर विषय बन सकता है।

 

धान की फसल के बीच मिट्टी कहां से आई तकनीकी जांच का सवाल

 

मौके पर सड़क के दोनों ओर धान की फसल खड़ी दिखाई देने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों और मौके की स्थिति को देखते हुए यह जानना जरूरी है कि सड़क की पटरी के लिए मिट्टी कहां से लाई गई, कितनी मात्रा में लाई गई और उसका परिवहन किस माध्यम से हुआ।

 

मनरेगा कार्यों में स्वीकृत एस्टीमेट, माप पुस्तिका, मस्टर रोल, कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति और भुगतान विवरण का आपस में मिलान कराए जाने से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

 

तकनीकी सहायक की भूमिका पर भी उठे सवाल

 

कार्य का तकनीकी एस्टीमेट और माप से जुड़े बिंदुओं को लेकर मनरेगा तकनीकी सहायक कृष्णकांत त्रिपाठी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोपों के संबंध में उनसे जवाब मांगे जाने पर उनके द्वारा “ठीक है, देखते हैं” कहे जाने की बात सामने आई है।

 

हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित अभिलेखों और स्थलीय तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में सवाल यह है कि यदि मौके और अभिलेखों में अंतर मिलता है तो उसकी जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी।

 

एपीओ ने जांच का दिया आश्वासन

 

मामले को लेकर संबंधित एपीओ की ओर से जांच कराने का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित रहती है या कार्यस्थल पर मौजूद वास्तविक स्थिति, मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, भुगतान, माप पुस्तिका और स्वीकृत एस्टीमेट का मिलान कराकर निष्कर्ष तक पहुंचा जाता है।

 

मस्टर रोल से भुगतान तक जांच जरूरी

 

मनरेगा कार्यों में मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और अभिलेखों में दर्ज उपस्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण है। मैरी ग्राम सभा के इन दोनों कार्यों में उठे सवालों के बीच संबंधित अधिकारियों से मांग की जा रही है कि—

 

मौके पर श्रमिकों की वास्तविक संख्या का सत्यापन कराया जाए

संबंधित अवधि के मस्टर रोल की जांच हो।

मजदूरों के खाते में हुए भुगतान का मिलान कराया जाए।

कार्य की माप पुस्तिका और तकनीकी एस्टीमेट की जांच हो।

मिट्टी की मात्रा और उसके स्रोत का सत्यापन किया जाए।

– कार्य की जियो-टैग तस्वीरों और अभिलेखों का मौके की स्थिति से मिलान कराया जाए।

जांच में अनियमितता मिलने पर नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए।

 

फिलहाल मैरी ग्राम सभा के इन कार्यों में सामने आई विसंगतियों की स्वतंत्र एवं तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभिलेखों और धरातल के बीच अंतर का वास्तविक कारण क्या है। अब देखना होगा कि निचलौल ब्लॉक प्रशासन जांच को किस स्तर तक ले जाता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है।

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