- न्यूज़ 18 प्लस ब्यूरो/सिसवा बाजार
करीब चार करोड़ की परियोजना में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोपों की जांच में सामने आई अनियमितताएं; तत्कालीन ईओ, अवर अभियंता और लिपिक के निलंबन की संस्तुति।
सिसवा बाजार, महराजगंज। सिसवा बाजार नगर पालिका के मीरा बाई नगर वार्ड संख्या-25 में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन अमृत सरोवर परियोजना अब गंभीर सवालों के घेरे में है। परियोजना में कथित भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज, अवर अभियंता देवेंद्र कुमार और लिपिक विनोद कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रियंका मिश्रा से स्पष्टीकरण लिए जाने की संस्तुति की गई है। इसके अलावा वर्तमान अधिशासी अधिकारी विंध्याचल को भी स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
शिकायत के बाद बनी तीन सदस्यीय जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने 18 जुलाई 2026 को प्राप्त शिकायत के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति में एसडीएम निचलौल, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग तथा उपायुक्त श्रम रोजगार को शामिल किया गया था।
समिति ने मौके पर पहुंचकर परियोजना के निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण करने के साथ संबंधित अभिलेखों की भी जांच की। इसके बाद तैयार की गई रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई, जिसके आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
तीन बच्चों की मौत ने भी खड़े किए गंभीर सवाल
अमृत सरोवर परियोजना से जुड़ी जांच के दौरान तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत की घटना को भी गंभीरता से लिया गया। समिति को निर्माण कार्य के साथ-साथ परियोजना की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करने के निर्देश दिए गए थे।
घटना के बाद संबंधित ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे जेल भेजा जा चुका है। अब प्रशासनिक जांच में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रमुख सचिव नगर विकास को भेजी रिपोर्ट
जिलाधिकारी ने मामले में नियमानुसार कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव, नगर विकास को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति की है। प्रशासन की इस कार्रवाई से नगर पालिका के विकास कार्यों में गुणवत्ता, निगरानी और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर जिम्मेदारी तय करने का स्पष्ट संदेश गया है।
डीएम बोले—सरकारी धन की बंदरबांट बर्दाश्त नहीं
जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने स्पष्ट किया कि सरकारी धन से संचालित विकास कार्यों में भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनहित से जुड़े कार्यों में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अमृत सरोवर जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में जांच के बाद शुरू हुई कार्रवाई ने नगर पालिका के निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच की संस्तुतियों पर शासन स्तर से आगे क्या कार्रवाई होती है।