Bureau Report/ Rakesh Tripathi /Maharajganj News 18 Plus /Chief Editor
महराजगंज जनपद के निचलौल तहसील क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम सभा ढेसो, तप्पा डोमाखण्ड, परगना तिलपुर निवासी प्रार्थी जोगेंद्र गौड़ (पुत्र मंजेश गौड़) ने नवागत जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल को दिए गए प्रार्थना पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रार्थी के अनुसार, उसकी पुश्तैनी जमीन पर बने मकान को दिनांक 14 सितंबर 2024 को जिला प्रशासन द्वारा गिरा दिया गया, जबकि उस भूमि को लेकर न्यायालय से स्टे ऑर्डर (स्थगन आदेश) भी प्राप्त था। प्रार्थी का दावा है कि उक्त जमीन उसके पूर्वज रघुवीर पुत्र नरेशी के नाम चकबंदी से पहले खतौनी में दर्ज रही है, और यह नाम खतौनी 41, 45, फॉर्म-4, फॉर्म-5 सहित अन्य अभिलेखों में भी दर्ज है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
प्रार्थी ने आरोप लगाया कि न्यायालयीन आदेश के बावजूद उसकी संपत्ति को ध्वस्त कर दिया गया, जो न केवल कानून की अवहेलना है बल्कि प्रशासनिक मनमानी का भी उदाहरण है। उसने यह भी बताया कि इस मामले में कमिश्नरी और अपर जिलाधिकारी न्यायालय से भी राहत प्राप्त थी।
लेखपाल पर गंभीर आरोप!
मामले में निचलौल तहसील में तैनात लेखपाल अवधेश सिंह (पुत्र ओमप्रकाश सिंह) पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रार्थी के अनुसार:
लेखपाल ने जमीन खाली कराने को लेकर जान से मारने की धमकी दी।
कथित रूप से कहा गया कि नोटरी बनवाकर सभी अधिकार छोड़ दो, नहीं तो परिणाम भुगतने होंगे,प्रार्थी का दावा है कि उसके पास इन धमकियों के साक्ष्य भी मौजूद हैं।
लंबे समय से एक ही जगह तैनाती पर उठे सवाल।
प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लेखपाल पिछले लगभग 10 वर्षों से एक ही क्षेत्र में तैनात हैं, जिससे निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में।
पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, प्रार्थी और उसके पिता को थाना निचलौल बुलाकर बिना निष्पक्ष सुनवाई के हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, उसकी पत्नी और परिवार की महिलाओं के खिलाफ भी धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई, जबकि वे मौके पर मौजूद भी नहीं थीं।
प्रार्थी की मांग!
प्रार्थी जोगेंद्र गौड़ ने जिलाधिकारी से मांग की है कि:
पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए!
दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए
उसकी पुश्तैनी जमीन पर न्याय दिलाया जाए!
यह मामला न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि आरोप सही हैं तो कानून की धज्जियां उड़ाई गई हैं। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी इस गंभीर प्रकरण में क्या कार्रवाई करते हैं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।