48 किमी की रफ्तार पर चालान! NH-727B पर यातायात कार्रवाई को लेकर उठे सवाल जगह जगह बिना स्पीड सिंबल दर्शाये काट रहे चालान

विशेष संवाददाता नरसिंह उपाध्याय | न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो, महराजगंज

 

वाहन चालक ने लगाया नियमों के विपरीत कार्रवाई का आरोप, स्पीड लिमिट और चालान की वैधता स्पष्ट करने की मांग

 

परतावल। परतावल-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग NH-727B पर यातायात पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक वाहन चालक ने गंभीर सवाल उठाए हैं। चालक का आरोप है कि उसका वाहन महज 48 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चल रहा था, इसके बावजूद यातायात पुलिस द्वारा ओवरस्पीडिंग के आरोप में चालान कर दिया गया। मामले के सामने आने के बाद वाहन चालकों के बीच चर्चा तेज हो गई है और संबंधित कार्रवाई की नियमसंगतता स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है।

 

क्या 48 किमी की रफ्तार ओवरस्पीडिंग है?

 

यातायात नियमों के अनुसार किसी वाहन को निर्धारित गति सीमा से अधिक गति पर चलाना ओवरस्पीडिंग की श्रेणी में आता है। ऐसे में केवल वाहन की गति 48 किमी प्रति घंटा होने से यह स्वतः साबित नहीं होता कि चालक ने ओवरस्पीडिंग की है। चालान की वैधता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित मार्ग पर उस श्रेणी के वाहन के लिए निर्धारित अधिकतम गति सीमा क्या थी और पुलिस द्वारा किस आधार पर चालान किया गया।

 

इसी बिंदु को लेकर वाहन चालक ने सवाल उठाया है कि यदि संबंधित स्थान पर निर्धारित गति सीमा 48 किमी प्रति घंटा से अधिक थी, तो फिर किस नियम के तहत ओवरस्पीडिंग का चालान किया गया। वहीं, यदि मौके पर कोई अलग गति सीमा लागू थी तो उसे स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

 

चालान की वजह और स्पीड रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

 

मामले में वाहन चालक की ओर से मांग की गई है कि चालान में दर्ज निर्धारित गति सीमा, वाहन की रिकॉर्ड की गई गति, चालान की धारा तथा स्पीड मापने वाले उपकरण का विवरण स्पष्ट किया जाए। इससे यह साफ हो सकेगा कि कार्रवाई निर्धारित यातायात नियमों और तकनीकी रिकॉर्ड के आधार पर हुई या नहीं।

 

वाहन चालकों में नाराजगी

 

घटना की चर्चा के बाद हाईवे से गुजरने वाले कुछ वाहन चालकों ने भी यातायात कार्रवाई में पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए गति नियंत्रण जरूरी है, लेकिन चालान की कार्रवाई भी निर्धारित नियमों और स्पष्ट प्रमाण के आधार पर होनी चाहिए। इससे वाहन चालकों में भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी और यातायात पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा कायम रहेगा।

 

उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग

 

वाहन चालक ने यातायात विभाग के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है की NH-727B के संबंधित स्थान पर बिना स्पीड सिंबल दर्शाये काट दिए जा रहे चालान उस समय लागू गति सीमा कितनी थी और 48 किमी प्रति घंटा की दर्ज गति पर किस आधार पर चालान किया गया। यदि चालान नियमों के अनुरूप पाया जाता है तो उसका आधार सार्वजनिक किया जाए और यदि कार्रवाई में कोई त्रुटि सामने आती है तो नियमानुसार उसका निराकरण किया जाए।

 

सड़क सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कार्रवाई की पारदर्शिता और नियमों का समान रूप से पालन उससे भी अधिक जरूरी है।

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