ब्यूरो रिपोर्ट /अनुभव पटेल/निचलौल
महराजगंज/निचलौल: निचलौल कस्बे में इन दिनों कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। पेट्रोल पंपों पर उमड़ रही भारी भीड़ और आए दिन हो रहे विवादों के बावजूद स्थानीय पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। थानाध्यक्ष की इस ‘चुप्पी’ और पुलिस की नदारद मौजूदगी ने क्षेत्र की जनता के मन में सुरक्षा को लेकर गहरा डर पैदा कर दिया है।
थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
कल थाना रोड स्थित यादव पेट्रोल पंप पर हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा थानाध्यक्ष की प्रशासनिक पकड़ पर बड़ा सवालिया निशान है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पंप कर्मियों ने सरेआम गुंडागर्दी करते हुए एक पत्रकार का मोबाइल छीना और अभद्रता की। जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? पुलिस ने मौके पर पहुँचकर मामले को गंभीरता से लेने के बजाय ‘समझा-बुझाकर’ रफा-दफा कर दिया, जिसे थानाध्यक्ष की ढुलमुल कार्यशैली का नतीजा माना जा रहा है।
नहीं ली गई बीते दिन की घटना से सीख:
बीते कल की हिंसक घटना के बावजूद आज पावर हाउस के पास स्थित इंडियन ऑयल पंप पर स्थिति और भी भयावह दिखी। पेट्रोल के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी, अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन सुरक्षा के नाम पर वहाँ एक भी खाकी वर्दी नजर नहीं आई। आखिर थानाध्यक्ष इतने बेपरवाह कैसे हो सकते हैं? क्या पुलिस किसी बड़े खूनी संघर्ष या अनहोनी का इंतजार कर रही है?
पंपों पर ‘जंगलराज’, पुलिस प्रशासन बेखबर:
सड़क से चंद कदमों की दूरी पर स्थित पेट्रोल पंपों पर अराजकता का माहौल है, लेकिन थानाध्यक्ष निचलौल की ओर से सुरक्षा का कोई खाका तैयार नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि अपराधियों और दबंगों में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस पिकेट की अनुपस्थिति थानाध्यक्ष की विफलता को उजागर करती है।
बड़ा सवाल:
“थाना रोड पर ही जब गुंडागर्दी हो रही है और पुलिस बेखबर है, तो दूर-दराज के इलाकों की सुरक्षा का भगवान ही मालिक है। थानाध्यक्ष की यह कार्यप्रणाली क्षेत्र की शांति व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही है।”