Bureau Report /News 18 Plus /Sindooriya
ठूठीबारी में वरिष्ठ पत्रकार के घर पहुंचने को लेकर विवाद, जानकारी मांगने पर फोन ब्लॉक करने का आरोप; पत्रकारों से व्यवहार को लेकर चर्चा तेज।
महराजगंज। सिंदुरिया थाने की जिम्मेदारी संभाले अभी तीन दिन भी पूरे नहीं हुए हैं और थानाध्यक्ष अनूप तिवारी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। ठूठीबारी में तैनाती के दौरान वरिष्ठ पत्रकार दिनेश रौनियार के घर पहुंचने और कथित तौर पर बिना किसी स्पष्ट आदेश के घर में प्रवेश किए जाने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस दौरान थाना प्रभारी के तेवर को लेकर भी चर्चा हुई। पत्रकार द्वारा थानाध्यक्ष से उनकी पूर्व तैनातियों और किन-किन चौकियों पर जिम्मेदारी निभाने को लेकर जानकारी मांगी गई। आरोप है कि पहली बार फोन किए जाने पर कॉल काट दी गई। इसके बाद मैसेज करने पर दोबारा फोन आया, लेकिन बाद में पत्रकार का मोबाइल नंबर और व्हाट्सऐप ब्लॉक कर दिया गया।
पत्रकारों से संवाद से परहेज क्यों?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर पुलिस अधिकारी और पत्रकारों के बीच संवाद को लेकर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई? पत्रकारों का काम सवाल पूछना और जनता से जुड़े मुद्दों की जानकारी सामने लाना है। ऐसे में सवाल पूछे जाने पर संवाद बंद कर देना या नंबर ब्लॉक कर देना पुलिस-पत्रकार संबंधों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
ठूठीबारी में तैनाती के दौरान भी थानाध्यक्ष के कथित सख्त तेवरों को लेकर चर्चाएं सामने आने की बात कही जा रही है। स्थानीय पत्रकारों के साथ उनके व्यवहार को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हालांकि अभी नहीं हुई है।
घर में प्रवेश को लेकर भी उठे सवाल
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि किसी निजी आवास में पुलिस द्वारा प्रवेश अथवा तलाशी की कार्रवाई की गई थी तो उसकी वैधानिक प्रक्रिया क्या थी और किस आदेश अथवा कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की गई? भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में पुलिस तलाशी के लिए विशेष परिस्थितियों में प्रक्रिया निर्धारित है, जिसमें कारण दर्ज करने और तलाशी का रिकॉर्ड रखने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
ऐसे में संबंधित अधिकारी से यह स्पष्ट किए जाने की जरूरत है कि दिनेश रौनियार के आवास पर पहुंचने का उद्देश्य क्या था और यदि कोई तलाशी अथवा आधिकारिक कार्रवाई हुई थी तो उसका आधार क्या था।
अब सिंदुरिया की चुनौती बड़ी
सिंदुरिया थाना क्षेत्र में नए थानाध्यक्ष के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। क्षेत्र में नशीले पदार्थों के कथित अवैध कारोबार, अवैध शराब और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना पुलिस के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
अनूप तिवारी को महराजगंज के विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती का अनुभव रहा है और सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों तथा सीमा क्षेत्र से जुड़े अपराधों की कार्यप्रणाली की जानकारी भी बताई जाती है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सिंदुरिया में उनकी कार्यशैली कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और आमजन से संवाद के मोर्चे पर कैसी रहती है।
सवाल सीधा है—सवालों से संवाद होगा या दूरी?
सिंदुरिया में नई जिम्मेदारी संभालने के शुरुआती दिनों में ही यदि पुलिस और पत्रकारों के बीच संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो यह प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान देने वाला विषय है। अब देखना होगा कि थानाध्यक्ष अनूप तिवारी इन विवादों से आगे निकलकर निष्पक्ष कार्रवाई, पारदर्शिता और बेहतर पुलिस-पब्लिक संवाद की मिसाल कायम कर पाते हैं या नहीं।