न्यूज़ 18प्लस ब्यूरो/निचलौल
महराजगंज। निचलौल थाना क्षेत्र से जुड़े जिस प्रकरण को लेकर सवाल उठाए गए थे, उस पर महराजगंज पुलिस की ओर से जवाब तो सामने आ गया, लेकिन जवाब ने कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि कस्बा निचलौल स्थित होटल, रेस्टोरेंट आदि में सीसीटीवी कैमरे क्रियाशील पाए गए हैं और समय-समय पर पुलिस द्वारा चेकिंग की जाती है। जांच के दौरान दुकानों और रेस्टोरेंटों में नाबालिग बच्चों का नाश्ते के लिए आना भी पाया गया तथा मौके पर शांति व्यवस्था कायम होने की बात कही गई है।
लेकिन सवाल यह है कि अगर संबंधित स्थान पर सीसीटीवी कैमरे वास्तव में लगे और क्रियाशील हैं, तो जिस स्थान पर पर्दा लगा होने की बात सामने आई है, वहां का कैमरा क्या पर्दे के पीछे की गतिविधियों को भी रिकॉर्ड करता है? यदि कैमरा मौजूद है तो संबंधित समय की रिकॉर्डिंग जांच में शामिल की गई या नहीं, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
सिर्फ ‘शांति व्यवस्था कायम’ कह देने से खत्म नहीं होंगे सवाल
पुलिस की ओर से यह कहना कि मौके पर शांति व्यवस्था कायम है, अपने आप में उठे मूल सवालों का जवाब नहीं माना जा सकता। मामला कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पारदर्शिता और जांच की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है। यदि सीसीटीवी व्यवस्था मौजूद है तो उसकी जांच कर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि संबंधित स्थान पर वास्तव में क्या गतिविधियां हुईं और किस समय कौन-कौन लोग मौजूद थे।
‘कारख़ास’ मनीष सिंह की भूमिका को लेकर भी उठ रहे सवाल
प्रकरण में ‘कारख़ास’ के रूप में चर्चित मनीष सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उनकी भूमिका पर पहले से सवाल होने की स्थिति में जांच की निष्पक्षता को लेकर संदेह की गुंजाइश समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका यही होगा कि जांच को उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, मौके के साक्ष्य और अन्य सत्यापन योग्य तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाए।
यदि पुलिस के पास संबंधित स्थान की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, तो जांच में उसके परीक्षण का तथ्य और आवश्यक निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने से पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे न केवल शिकायतकर्ता के सवालों का जवाब मिलेगा, बल्कि पुलिस की जांच पर भी भरोसा मजबूत होगा।
सवाल सीधा है—कैमरा है तो फुटेज में क्या है? पर्दा है तो उसके पीछे क्या रिकॉर्ड हुआ? और यदि जांच में सब कुछ स्पष्ट है तो उसे तथ्यात्मक रूप से सामने रखने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए?