*निचलौल में संदिग्ध गतिविधियों पर सवाल, कारखास मनीष सिंह की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल!*

Bureau Report/ News 18 Plus /Nichlaul 

 

27 सितंबर को सूचना दिए जाने के दावे से गरमाया मामला, थाना प्रभारी तक सूचना पहुंचने से पहले ही प्रकरण निपटाने की चर्चा; ₹15 हजार में ‘मैनेज’ किए जाने के आरोप की भी जांच की मांग।

 

 

 

महराजगंज। निचलौल थाना क्षेत्र के थाना रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में कथित रूप से नाबालिग लड़कियों और वयस्क युवकों की आवाजाही को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। मां वैष्णो गारमेंट के सामने संचालित इस रेस्टोरेंट को स्थानीय लोग ‘चटोरी गली’ के नाम से भी जानते हैं। हालांकि लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेस्टोरेंट में सीसीटीवी कैमरे लगे होने की बात कही जाती है, लेकिन जिन स्थानों पर युवक-युवतियों के बैठने की चर्चा है, वहां निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह जांच का विषय है। ऐसे में सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, रिकॉर्डिंग और निगरानी व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है।

 

कारखास मनीष सिंह की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?

 

मामले में अब कारखास मनीष सिंह का नाम भी चर्चा में आ गया है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि 27 सितंबर को पूरे प्रकरण की सूचना कारखास मनीष सिंह को दी गई थी, लेकिन थाना प्रभारी तक तत्काल सूचना पहुंचने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

इसके साथ ही यह आरोप भी चर्चा में है कि मामला ₹15 हजार में ‘मैनेज’ कर दिया गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भुगतान से संबंधित कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायत की सूचना वास्तव में पहले ही दी गई थी तो इसकी जानकारी थाना प्रभारी तक क्यों नहीं पहुंची? क्या शिकायत पर कोई कार्रवाई हुई या उसे स्थानीय स्तर पर ही निपटा दिया गया?

 

व्यस्त थाना रोड पर निगरानी की मांग

 

थाना रोड निचलौल का प्रमुख और व्यस्त इलाका है। आसपास आवासीय क्षेत्र और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि होटल-रेस्टोरेंट में आने-जाने वालों की गतिविधियों, विशेषकर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर पुलिस को प्रभावी निगरानी करनी चाहिए।

 

पुलिस जांच से साफ होगी वास्तविक तस्वीर

 

मामले को लेकर थाना प्रभारी योगेंद्र राय ने कहा कि संबंधित शिकायतों और आरोपों की जांच कराई जाएगी। जांच में तथ्य सामने आने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 

फिलहाल पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 27 सितंबर को कथित सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया क्या रही और कारखास मनीष सिंह तक पहुंची शिकायत थाना प्रभारी तक क्यों नहीं पहुंची? वहीं ₹15 हजार में मामला ‘मैनेज’ किए जाने के आरोप की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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