Bureau Report /Dilip Kumar Pandey Sinduriya /Correspondent /News 18 Plus
डीएम के आदेश के बाद एसडीएम ने दिए थे निस्तारण के निर्देश, फिर भी चौकी इंचार्ज के कथित बयान से गरमाया मामला
महराजगंज जनपद के चिउटहां चौकी पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। एक साधारण नाली विवाद अब प्रशासनिक निष्पक्षता और पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, विवाद की शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद मामला एसडीएम सिद्धार्थ गुप्ता के समक्ष प्रस्तुत हुआ। एसडीएम ने थाना प्रभारी चिउटहां को राजस्व टीम के साथ संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
इसी बीच विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब चौकी इंचार्ज मनोज कुमार यादव द्वारा कथित रूप से यह कहा गया कि संबंधित भूमि पर एक पक्ष का “पचासों वर्षों से कब्जा” है। इस कथित बयान के बाद स्थानीय लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि जब राजस्व अभिलेखों और विधिवत जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तब इतने निश्चित निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा गया।
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि थाना क्षेत्र के विभिन्न मामलों में कुछ बाहरी व्यक्तियों और कथित “काराख़ास” की सक्रिय भूमिका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मामलों में फरियादियों को सीधे पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बजाय पहले ऐसे लोगों से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच से पहले ही किसी पक्ष के कब्जे को सही ठहराने जैसे बयान दिए जाते हैं, तो इससे पुलिस की निष्पक्षता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं और आमजन का भरोसा प्रभावित होता है।
अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि पुलिस अधीक्षक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह नियमों और साक्ष्यों के आधार पर हुई या नहीं। जांच के बाद ही सभी तथ्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।