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तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार परिवार को रौंदा, महिला की हालत नाजुक; गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर!
दो दर्जन से अधिक मौतों के बाद भी नहीं चेता प्रशासन, आखिर कब बनेगा मौत का यह चौराहा सुरक्षित?
महाराजगंज जिले के सिन्दुरिया थाना क्षेत्र के चिउटहां चौराहे पर मंगलवार की सुबह एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। सुबह करीब 5:30 बजे तेज गति से आ रही एक अनियंत्रित कार ने बाइक सवार परिवार को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
जानकारी के अनुसार, पुरैना निवासी अजय (25) अपने पिता सुभाष पासवान और माता फूलमती के साथ बाइक से निचलौल की तरफ जा रहे थे। तभी सिन्दुरिया से सिसवा की ओर जा रही तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को सामने से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सड़क पर दूर जा गिरी और तीनों घायल हो गए।
हादसे में अजय और उनके पिता को मामूली चोटें आईं, जबकि फूलमती के सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। दुर्घटना के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह भागने में सफल रहा।
सूचना मिलते ही चिउटहां चौकी इंचार्ज अमित रंजन सिंह और हेड कांस्टेबल रवि प्रकाश मौके पर पहुंचे और एंबुलेंस की मदद से घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिसवा भिजवाया। वहां चिकित्सकों ने फूलमती की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
चौकी इंचार्ज अमित रंजन सिंह ने बताया कि घायलों को इलाज के लिए भेज दिया गया है। तहरीर मिलने पर मामले में जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महिला की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
मौत का चौराहा बन चुका है चिउटहां!
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला हादसा नहीं है। चिउटहां चौराहा अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों की जान ले चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी गहरी नींद में सोया हुआ है। लोगों का आरोप है कि प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को कई बार स्पीड ब्रेकर और सुरक्षा व्यवस्था के लिए सूचित किया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में लोग घायल हो रहे हैं और मौतें हो रही हैं, लेकिन प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की संवेदनहीनता खत्म होने का नाम नहीं ले रही। विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी? क्या किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? जिले के नवागत जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल इस गंभीर समस्या पर क्या कार्रवाई करते हैं, इस पर अब पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।